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Gold Price Projection : सोने-चांदी की कीमतों में अभी भले ही गिरावट दिख रही हो, लेकिन आने वाले त्योहारी सीजन में इसकी कीमतों में कितना उछाल या गिरावट आ सकती है. विश्लेषकों का कहना है त्योहारी सीजन होने और डिमांड बढ़ने के बावजूद इस साल सोने और चांदी की कीमतों में ज्यादा उछाल नहीं आएगा.
त्योहारी सीजन में सोने और चांदी की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी.
नई दिल्ली. त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है और सोने-चांदी की कीमतों में आ रही गिरावट से साफ पता चलता है कि इस बार कीमतों में ज्यादा उछाल आने की संभावना नहीं है. विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों के 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने और रुपये की चाल से आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. अभी निवेशकों की नजर शुरुआत में चीन के आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी, जो औद्योगिक धातुओं और चांदी के लिए अहम हैं. इसके बाद अमेरिका के आवास संबंधी आंकड़ों, उपभोक्ता धारणा, महंगाई की उम्मीदों और भारत, ब्रिटेन व अमेरिका सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के पीएमआई आंकड़ों पर नजर रहेगी.
ब्रोकरेज मंच लेमॉन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि हमें इस सप्ताह कीमतों में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव की उम्मीद है. होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर इसके असर से बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी, जिससे सोने और चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ने से ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका है, जो सोने-चांदी की कीमतों में तेजी को सीमित कर सकती है. हालांकि, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड में नरमी से इन धातुओं को कुछ समर्थन मिल सकता है.
कितनी रहेगी एमसीएक्स पर कीमत
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने का वायदा भाव बीते सप्ताह 3,581 रुपये यानी 2.4 फीसदी की गिरावट के साथ 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. वहीं, चांदी 14,568 रुपये यानी 6.4 फीसदी टूटकर 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. गर्ग ने कहा कि रुपये में मजबूती के कारण घरेलू बाजार में सोने की कीमत 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गई. इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतों का अंतर बढ़ गया है.
क्यों आ रही कीमतों में गिरावट
उन्होंने कहा कि कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह मुद्रा में बदलाव रहा है. भारतीय रुपया पांच कारोबारी सत्रों में 96.8 के स्तर से मजबूत होकर 94.8 के स्तर पर पहुंच गया. इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये में 180 पैसे से अधिक की मजबूती आई. इसमें भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप और कारोबारियों की ओर से डॉलर की खरीद के सौदे घटाने की भूमिका रही. रुपये में मजबूती आने के बाद सोने की लागत कम हो गई है, जिससे घरेलू बाजार में चार सत्र के दौरान इसकी कीमत 3,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक गिर गई है. यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट से करीब पांच गुना ज्यादा थी.
चांदी में भी दिख रही नरमी
गर्ग ने कहा कि ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताओं का चांदी पर ज्यादा असर पड़ा. इसकी कीमत में तेज गिरावट आई और बाद में यह करीब 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंची. उन्होंने कहा कि कारोबारियों पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के मुकाबले रुपये की चाल का ज्यादा असर पड़ा. जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (जिंस एवं मुद्रा शोध) प्रणव मेर ने कहा कि पहले की बिकवाली के सौदे काटने और निचले स्तर पर खरीदारी के कारण इनमें तेजी का रुख रहा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

