Thursday, November 5, 2026
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दक्षिण भारत का 130 साल पुराना मशहूर मदुगुला हलवा


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Diwali Special Halwa Recipe: दिवाली पर इस बार कुछ अलग और खास मिठाई बनाने की सोच रहे हैं तो 130 साल पुराना दक्षिण भारतीय हलवा बेहतरीन विकल्प हो सकता है. अपनी पारंपरिक पहचान और अनोखे बनाने के तरीके के लिए मशहूर इस हलवे के दीवाने पूरे दक्षिण भारत में हैं. इसकी खास तैयारी और लाजवाब स्वाद इसे दूसरी मिठाइयों से अलग बनाते हैं. त्योहार पर इस पुरानी रेसिपी से घर में पारंपरिक मिठास घोल सकते हैं.

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हैदराबाद: दिवाली के त्योहार पर घरों में तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां तैयार की जाती हैं लेकिन दक्षिण भारत में एक ऐसी खास मिठाई है जिसके बिना कई लोगों का त्योहार अधूरा माना जाता है. हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले के मशहूर मदुगुला हलवा की. अपनी अनोखी बनावट, लाजवाब स्वाद और शुद्धता के कारण यह हलवा सिर्फ आंध्र प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण भारत में काफी लोकप्रिय है.

इस हलवे की सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने का पारंपरिक और देसी तरीका है जो सौ साल से भी अधिक समय से चला आ रहा है. आज के आधुनिक दौर में जहां मिठाइयां मशीनों से बनाई जाती हैं वहीं मदुगुला कस्बे में आज भी स्थानीय महिलाएं इसे पूरी तरह हाथों से और मिट्टी के चूल्हों पर तैयार करती हैं.

दूध ही इस हलवे का मुख्य आधार होता
मदुगुला हलवा बनाने की रेसिपी काफी मेहनत और सब्र की मांग करती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबुत गेहूं को अच्छी तरह पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद भीगे हुए गेहूं को पत्थर की पारंपरिक चक्की या सिलबट्टे पर बारीक पीसा जाता है. पीसने के बाद गेहूं का गाढ़ा सफेद सत्व यानी गेहूं का दूध छाना जाता है. यह दूध ही इस हलवे का मुख्य आधार होता है.

मिट्टी के चूल्हों पर लकड़ी की आग जलाई जाती
इसके बाद खुली जगह में बने मिट्टी के चूल्हों पर लकड़ी की आग जलाई जाती है. पीतल के बड़े बर्तनों में गुड़ या चीनी की चाशनी बनाई जाती है और फिर उसमें गेहूं का निकाला हुआ दूध धीरे-धीरे मिलाया जाता है. कड़ाही को चूल्हे पर चढ़ाने के बाद इसे लगातार लंबी करछी से चलाना पड़ता है ताकि मिश्रण नीचे न चिपके.

पकने के बाद जब इसे चौकोर ट्रे में पलटा जाता
पकने के दौरान इसमें भारी मात्रा में शुद्ध देसी घी डाला जाता है. इसके साथ ही इसमें ढेर सारे कटे हुए काजू और अन्य मेवे मिलाए जाते हैं. धीमी आंच पर कई घंटों तक लगातार पकने के बाद जब यह गाढ़ा होकर गहरे भूरे रंग की जेली जैसा चमकदार दिखने लगता है तब जाकर यह हलवा पूरी तरह तैयार होता है. पकने के बाद जब इसे चौकोर ट्रे में पलटा जाता है, तो इसके ऊपर से शुद्ध घी अपने आप छलकने लगता है.

उपहार के रूप में देने के लिए हफ्तों पहले से ऑर्डर करते
दिवाली के मौके पर इस पारंपरिक हलवे की मांग कई गुना बढ़ जाती है. लोग इसे त्योहारों पर परिवार के साथ खाने और रिश्तेदारों को उपहार के रूप में देने के लिए हफ्तों पहले से ऑर्डर करते हैं. शुद्ध सामग्री और देसी स्वाद ही इस हलवे को दक्षिण भारत की सबसे खास मिठाइयों में शामिल करता है.

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Jagriti Dubey

मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…

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