Wednesday, July 1, 2026
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दिल्ली विधानसभा में डॉ. आशुतोष मुखर्जी को श्रद्धांजलि: विशेष ग्रंथ होगा जारी, जेपी नड्डा करेंगे संकलित भाषणों का लोकार्पण, सीएम रहेंगी मौजूद – New Delhi News




डॉ. आशुतोष मुखर्जी की 162वीं जयंती के अवसर पर दिल्ली विधानसभा मंगलवार को उनके संसदीय विचारों पर आधारित विशेष स्मारक ग्रंथ ‘बंगाल टाइगर आशुतोष मुखर्जी के संकलित भाषण’ का लोकार्पण करेगी। यह समारोह दिल्ली विधानसभा सदन में आयोजित होगा। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश (जे.पी.) नड्डा इस विशेष ग्रंथ का विमोचन करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता करेंगे। समारोह में सीएम रेखा गुप्ता, शिक्षा, गृह एवं शहरी विकास मंत्री आशीष सूद तथा विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके अलावा विधायक, शिक्षाविद्, विधिवेत्ता, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों की भी उपस्थिति रहेगी। डॉ. आशुतोष मुखर्जी, जिन्हें ‘बंगाल टाइगर’ के नाम से जाना जाता है, स्वतंत्रता-पूर्व भारत के प्रमुख शिक्षाविद्, विधिवेत्ता और राष्ट्रनिर्माताओं में गिने जाते हैं। वे 1904 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य रहे और उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, संस्थान निर्माण तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता को नई दिशा देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. मुखर्जी के संसदीय भाषणों को एक ही संकलन में प्रस्तुत किया दिल्ली विधानसभा द्वारा प्रकाशित इस स्मारक ग्रंथ में पहली बार डॉ. मुखर्जी के संसदीय भाषणों को एक ही संकलन में प्रस्तुत किया गया है। इससे शिक्षा, संवैधानिक शासन, संस्थान निर्माण और सार्वजनिक जीवन से जुड़े उनके विचार विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, विधायकों और आम पाठकों तक व्यवस्थित रूप से पहुंच सकेंगे। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि यह प्रकाशन केवल एक स्मारक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक और शैक्षणिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसका उद्देश्य उन राष्ट्रीय विभूतियों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कौन थे डॉ. आशुतोष मुखर्जी 1864 में जन्मे, 1924 में हुआ निधन ‘बंगाल टाइगर’ के नाम से थे प्रसिद्ध प्रख्यात शिक्षाविद्, विधिवेत्ता और राष्ट्रनिर्माता 1904 में इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य बने उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और संस्थान निर्माण में दिया ऐतिहासिक योगदान पहली बार उनके संसदीय भाषण एक ही संकलन में प्रकाशित किए गए हैं



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