पॉक्सो मामलों के विशिष्ट न्यायाधीश बृजेश कुमार शर्मा ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नाबालिग आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कारावास और 1 लाख 2 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके साथ ही पीड़ित बालिका को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिलाने का भी आदेश दिया गया है। इस मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य, विशेषकर डीएनए रिपोर्ट, आरोपी को दोषी सिद्ध करने का प्रमुख आधार बनी। विशिष्ट लोक अभियोजक गजेंद्र शर्मा ने बताया कि यह मामला जिले के महावीरजी थाना क्षेत्र का है। पीड़ित बालिका की ताई ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार घटना से लगभग तीन-चार महीने पहले आरोपी बालक ने पीड़िता को अपनी मौसी के लड़के को खिलाने के बहाने अपने घर बुलाया था। जब पीड़िता उसके घर पहुंची, तो आरोपी उसे जबरन एक कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के चिल्लाने पर आरोपी ने उसके मुंह में चुन्नी ठूंस दी और धमकी दी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसे जान से मार देगा। इस डरावनी घटना और जान से मारने की धमकी के कारण पीड़िता चुप रही। परिणामस्वरूप, उसे चार माह का गर्भ ठहर गया। पेट में बदलाव देखने के बाद पीड़िता ने अपनी ताई को पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद महावीरजी थाने में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन अनुसंधान किया और आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में 21 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त 43 महत्वपूर्ण दस्तावेज साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। पीड़िता के गर्भपात के बाद सुरक्षित रखे गए भ्रूण के सैंपल और विधि से संघर्षरत बालक के खून के नमूने की डीएनए जांच कराई गई थी। फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि भ्रूण का जैविक पिता वही बालक था। इन सभी पुख्ता और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 साल के कारावास और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई।
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