नमस्कार, यूडीएच मंत्रीजी बार-बार गुस्सा हो रहे थे, इस बार उनके चेहरे पर मुस्कान बिखर ही गई। डांसर गौरी नागौरी का कहना है कि मंत्री किरोड़ी लाल जी मुस्कुरा कर देख लेते हैं, इतना ही काफी है और बालोतरा से ट्रांसफर कराने के लिए पटवारी ने ‘बड़े-बड़ों’ से सिफारिश करवा दी। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. लॉटरी में निकली खर्राजी की ‘मुस्कुराहट’ यूडीएच मंत्रीजी से निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर सवाल पूछे जा रहे थे। हर बार वो यही कहते के सरकार जल्दी चुनाव कराएगी। चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हुई तो तमाम तरह के आंदोलन शुरू हो गए। मांगें उठने लगीं, लोग धरने पर बैठने लगे। अब निकाय चुनाव में आरक्षण की लॉटरी निकल चुकी है। निकायों की आरक्षण लॉटरी निकालते वक्त मंत्रीजी बार-बार मुस्कुराते नजर आए। बीते दिनों सार्वजनिक मंचों और स्थानों पर वे गुस्से में तमतमाते दिखे थे। सीकर में एक बार पीए पर भड़के और फिर संगठन की बैठक में माइक संभाल रहे कार्यकर्ता पर। प्रेशर में गुस्सा निकलता ही है। अब प्रेशर हट गया। सबका ध्यान चुनाव में चला गया है। मंत्रीजी हल्का महसूस कर रहे होंगे। यही वजह है कि खोई हुई मुस्कान लौट आई है। देखने वाली बात ये मुस्कान चुनाव के बाद भी बरकरार रहती है या नहीं। 2. दिल में ‘किरोड़ी बाबा’ डांसर गौरी नागौरी किरोड़ी बाबा की तारीफ करते नहीं थक रही हैं। उनकी तुलना फिल्मी सितारों से कर दी। बोलीं- उनके एक इशारे पर लोग धूप-उमस में बैठे रहे। समर्थक उनके लिए इतने पागल हैं कि बाबा कहें तो 24 घंटे बैठे रहें। दौसा के मीणा हाईकोर्ट पर डांसर गौरी ने अपनी प्रस्तुति देकर दिल जीत लिया था। रही-सही कसर दौसा वालों को ये कहकर पूरी कर दी कि मुझे दौसा वालों से प्यार है। मंच संचालक तुरंत बीच में कूदा। पूछा- किरोड़ी बाबा भी बैठे हैं। गौरी बोली- वे तो दिल के पास हैं। मंत्रीजी का चेहरा खिल गया। गौरी नागौरी कई बार राजनीति में आने की महत्वकांक्षा जाहिर कर चुकी हैं। राजनीति में एंट्री के लिए माकूल वक्त का इंतजार है। जब तक डांस से फेम और पैसा मिल रहा है, चल रहा है। इसके बाद राजनीति में प्रवेश के लिए कोई तो चाहिए। गौरी से एक पत्रकार ने पूछा- क्या किरोड़ी बाबा से 2028 के चुनाव को लेकर टिकट की बात हुई? गौरी ने चतुराई से जवाब दिया। कहा- इस बारे में बात नहीं हुई, वे मुस्कुरा कर मेरी तरफ देख लेते हैं, इसी में सब कुछ है। 3. भ्रष्टाचार का ‘भैंस-कनेक्शन’ वे पूर्व मंत्री हैं। उनका नाम रोहिताश्व शर्मा है। वे पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के करीबी रहे। 5 साल पहले पार्टी विरोधी बयानबाजी के कारण उन्हें 6 साल के लिए बाहर कर दिया गया। वे बानसूर में घूसखोरी पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा- ऐसा नहीं था कि हमारे समय में भ्रष्टाचार नहीं था। तब अफसर डरते थे। दलालों के जरिए घूस लेते थे। अब तो कुर्सी पर बैठकर ऐसे रकम मांगते हैं जैसे भैंस बेचकर पैसा ले रहे हों। धड़ाके से बोलते हैं कि 5 हजार क्यों नहीं लाया रे? उन्होंने लोगों से कहा- हम भी इस व्यवस्था के आम नागरिक भी जिम्मेदार हैं। ये मत सोचो कि घूस नहीं दी तो काम नहीं होगा। मुझे सूचना दो और मेरा टेस्ट ले लो। मैं 2 मिनट में अफसर को सीधा कर दूंगा। फिर उन्होंने नाम लिए बिना विरोधी दल के नेताओं पर निशाना साधा। बोले- वे सब महाचोर हैं। वे मंत्री रहे। उनकी चोरी के आंकड़े मैंने अखबार में दिए। सोचिए। मंत्री को कोई चोर कह दे फिर भी उसका कुछ न बिगड़े, इसका मतलब मंत्री वाकई चोर है। गलत बोल रहा हूं तो जांच करा लो, गिरफ्तार कर लो। सरपंचों से पूछ लो कि इनका कटिंग की कितनी रकम मिलती थी। 5 लाख देने की बातें होती थी लेकिन कितना पैसा जेब में जाता था? कमीशन में चला जाता था। होशियार सरपंच ही कुछ बचा ले जाता था। पूर्व मंत्रीजी बानसूर में करप्शन पर बातें कर रहे थे और खबर आई कि नजदीकी कस्बे विराटनगर में तहसीलदार साहब रीडर समेत एसीबी के हत्थे चढ़ गए। रजिस्ट्री के कागजात सौंपने के नाम पर 55 हजार की रिश्वत लेते धरे गए। 4. चलते-चलते.. यूं तो 36 गुणों का विधान विवाह संस्कार में देखा जाता है। लेकिन एक पटवारी ऐसे हैं जिनके 36 के 36 गुण नेतागण से मिलते हैं। पटवारी साहब बालोतरा जिले के खेड़ गांव में पदस्थापित थे। भगवान जाने इन्होंने किस रीति-नीति से काम किया कि उन्हें चाहने वाले लोग उनके भक्त बन गए। और न चाहने वाले लोगों ने उनकी बदली कराने में पूरा जोर लगा दिया। उन्हें रोककर रखने वाले भी कम नहीं और दौड़ाने वालों की भी कमी नहीं। आखिरकार पटवारी साहब ने अपने गृह जिले जोधपुर जाने की मंशा जाहिर कर दी। उनके लिए बड़े बड़े नेताओं ने सिफारिश के पैगामों की झड़ी लगा दी। जोधपुर विधायक अतुल भंसाली, राजस्थान धरोहर प्रधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, पूर्व राज्यमंत्री महेंद्र राठौड़, यहां तक कि मंत्री जोराराम कुमावत तक ने सिफारिशी चिट्ठी लिख दी। ऐसे में ट्रांसफर होना ही था। जब ट्रांसफर की सूचना आई तो आधी रात घरों से निकलकर कुछ लोगों ने आतिशबाजी कर डाली। बोले कि पटवारी साहब से परेशान थे। अब निजात मिली। जबकि कुछ लोग कलेक्ट्रेट भागे और तबादला निरस्त करने की मांग करने लगे। कहा कि ऐसा पटवारी कभी नहीं मिलेगा। हमें तो यही पटवारी चाहिए। नौकरी चलेगी तब तक चलेगी। बाकी नेतागिरी में पटवारी महोदय का भविष्य उज्ज्वल कहा जा सकता है। इनपुट सहयोग- स्मित पालीवाल, रिषभ सैनी (जयपुर), राघवेंद्र गुर्जर (दौसा)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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