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गाजियाबाद के कविनगर में 46 साल पुरानी अरुण पान दुकान आज भी ग्राहकों के बीच खास पहचान रखती है. 1980 में सड़क किनारे 15 पैसे का पान बेचने से शुरू हुआ यह सफर अब ऐसा है कि दुकान खुलने से पहले ही ग्राहक यहां पहुंच जाते हैं. यहां देसी से लेकर बनारसी और स्पेशल मीठे पान तक कई विकल्प मिलते हैं.
गाजियाबाद: यूपी के गाजियाबाद शहर में पान खाने वालों की कमी नहीं है. कविनगर की एक पान की दुकान ऐसी है, जहां पान के शौकीनों का अंदाज ही अलग नजर आता है. दुकान खुलने से पहले ही यहां बड़ी-बड़ी गाड़ियां आकर खड़ी हो जाती हैं. कारों में बैठे लोग दुकान खुलने का इंतजार करते हैं और फिर अपनी पसंद का पान लेकर आगे बढ़ जाते हैं.
46 साल पुरानी इस दुकान पर शहर के कारोबारी, नौकरीपेशा लोग और कई प्रतिष्ठित लोग भी नियमित रूप से पहुंचते हैं. कई ग्राहकों के लिए यहां का पान रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन चुका है. अरुण पान दुकान की शुरुआत 1980 में हुई थी. दुकान के मालिक अरुण सिंघल लोकल 18 से बताते हैं कि उन्होंने सड़क किनारे बैठकर पान बेचने से शुरुआत की थी. उस समय एक पान की कीमत 15 पैसे थी. तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि छोटी सी यह शुरुआत आगे चलकर इतनी पहचान बना लेगी. धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई और आज स्थिति यह है कि दुकान खुलने से पहले ही कई ग्राहक यहां पहुंच जाते हैं.
अरुण सिंघल कहते हैं कि उनकी दुकान पर शहर के अलग-अलग इलाकों से लोग पान खाने आते हैं. इनमें कारोबारी, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और कई प्रतिष्ठित लोग शामिल हैं. ग्राहकों को यहां सिर्फ पान का स्वाद ही नहीं, बल्कि वर्षों से बना अपनापन भी खींचकर लाता है. कुछ ग्राहक सप्ताह के तय दिन यहां पहुंचते हैं, जबकि कई लोग रोजाना ऑफिस या कारोबार शुरू करने से पहले पान खाने के लिए रुकते हैं.
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पुरानी पीढ़ी के साथ अब युवाओं में भी इस दुकान के पान को लेकर दिलचस्पी दिखाई देती है. यही वजह है कि सुबह से लेकर दिन के अलग-अलग समय तक यहां ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है. अरुण पान की दुकान पर देसी सादा, देसी तंबाकू, देसी मीठा, बनारसी सादा, बनारसी मीठा और स्पेशल मीठा पान मिलता है. यहां पान की कीमत 25 रुपये से शुरू होकर 180 रुपये तक जाती है. स्पेशल मीठे पान का इस्तेमाल पूजा, सगाई और दूसरे शुभ अवसरों पर भी लोग करते हैं.
पान तैयार करने की प्रक्रिया भी ग्राहक की पसंद के अनुसार होती है. ताजा पान के पत्ते पर कत्था और चूना लगाया जाता है. इसके बाद ग्राहक की पसंद के हिसाब से इलायची, सुपारी और दूसरे मसाले डाले जाते हैं. अरुण सिंघल कहते हैं कि हर ग्राहक की पसंद अलग होती है और वर्षों से आने वाले ग्राहकों की पसंद उन्हें याद भी रहती है.

