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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल में गोपालक सम्मेलन में यह भरोसा दिलाया। वे मध्य प्रदेश को नारकोटिक्स से मुक्त करने के लिए मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक भी करने वाले थे, जो अपरिहार्य कारणों से टल गई।
सवाल है कि गृह मंत्री को मध्य प्रदेश में नशे के खिलाफ इतनी बड़ी घोषणा क्यों करनी पड़ी? इसका जवाब नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) और डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) के आंकड़ों में मिलता है। इनके मुताबिक, मध्य प्रदेश ड्रग्स तस्करी के बड़े केंद्रों में शामिल है।
भोपाल में 1,800 करोड़ की ड्रग्स फैक्ट्री से लेकर गुप्त लैब तक का नेटवर्क
मध्य प्रदेश में ड्रग्स की तस्करी के साथ अवैध निर्माण का नेटवर्क भी सामने आया है। औद्योगिक क्षेत्रों से लेकर गांवों तक में गुप्त लैब पकड़ी गई हैं।
- अक्टूबर 2024, भोपाल: बगरौदा औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्ट्री से 907 किलो मेफेड्रोन बरामद हुई। इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 1,800 करोड़ रुपए से ज्यादा आंकी गई थी। यहां से ड्रग्स दूसरे राज्यों और विदेशों में भेजी जा रही थी।
- अगस्त 2025, जगदीशपुर, भोपाल: एक अवैध यूनिट पकड़ी गई, जहां से 61.20 किलो लिक्विड मेफेड्रोन और मशीनें जब्त की गईं।
- नवंबर 2025, नीमच: लासुदिया गांव के एक मकान में चल रही लैब पकड़ी गई। यहां से राजस्थान और गुजरात तक ड्रग्स भेजी जा रही थी।
- 2026, महू: थावलाय गांव में एक गुप्त लैब मिली, जहां से 43.82 किलो मेफेड्रोन और 261.32 किलो प्रिकर्सर केमिकल बरामद हुआ। इसका नेटवर्क पुणे तक फैला था।
- आगर मालवा: एक नर्सरी (पौधशाला) की आड़ में ड्रग्स बनाने की लैब चल रही थी।

तस्करी के 3 तरीके: थार की स्टेपनी से सलवार-कुर्ते तक में छिपाई ड्रग्स
तस्कर पुलिस और DRI से बचने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं। पिछले एक महीने में सामने आए तीन मामले इसकी मिसाल हैं:
- केस 1, 30 सितंबर, इंदौर: DRI ने कर्नाटक नंबर की ब्लैक महिंद्रा थार रोकी। जांच में स्टेपनी (अतिरिक्त टायर) के अंदर छिपाई गई 7.116 किलो एम्फैटेमिन मिली, जिसकी कीमत 5.69 करोड़ रुपए बताई गई।
- केस 2, 24 सितंबर, भोपाल: रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर आगरा से आ रही एक नाइजीरियन महिला पकड़ी गई। उसके सलवार-कुर्ते के भीतर बनाए गए विशेष पैकेट से 2.368 किलो क्रिस्टल एम्फेटामिन बरामद हुई। इससे एक दिन पहले भोपाल जंक्शन पर एक भारतीय पुरुष से भी 2 किलो ड्रग्स मिली थी।
- केस 3, 21 सितंबर, इंदौर: इंदौर से पुणे जा रही स्लीपर बस में एक नाइजीरियन महिला गिरफ्तार की गई। उसके पास से 1.19 करोड़ रुपए की एम्फेटामाइन, MDMA गोलियां और हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद हुआ।

अब पूरे ड्रग नेटवर्क पर शिकंजे की तैयारी
अब सरकार ने पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आह्वान पर प्रदेश को 2029 तक नशामुक्त बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ड्रग्स बनाने वाली 17 गुप्त लैब का भंडाफोड़ किया जा चुका है। आदतन ड्रग अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई तेज की गई है।
पांच राज्यों की बैठक में संयुक्त कार्रवाई पर जोर
केंद्रीय गृह सचिव ने MP की उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ से लगी सीमाओं को देखते हुए पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त आसूचना और समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया। उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘ड्रग-मुक्त कैंपस’ फ्रेमवर्क लागू करने और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन पर भी जोर दिया गया।
मध्य प्रदेश में नशे के तीन बड़े नेटवर्क
विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में नशे के तीन प्रमुख प्रकार का नेटवर्क सक्रिय है।
- पारंपरिक नशा: गांजा, अफीम, हेरोइन और पोपी स्ट्रॉ (डोडाचूरा)। 2024 में मध्य प्रदेश से 1.29 लाख किलो पोपी हस्क जब्त किया गया।
- फार्मास्यूटिकल नशा: कोडीन युक्त कफ सिरप, नशीले इंजेक्शन और टैबलेट। विंध्य क्षेत्र के रीवा, सीधी, सतना और मऊगंज में कफ सिरप के इस्तेमाल की बात सामने आई है। 2024 में 18,511 इंजेक्शन और 2.81 लाख नशीली गोलियां जब्त की गईं।
- सिंथेटिक ड्रग्स: मेफेड्रोन (MD) और एम्फेटामाइन। इनकी तस्करी अब महानगरों के साथ छोटे शहरों और कस्बों तक भी सामने आ रही है।


