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बॉलीवुड के इतिहास में ‘धूम’ एक ऐसी फ्रैंचाइजी है, जिसने एक्शन फिल्मों की परिभाषा को पूरी तरह बदल दिया. साल 2004 में जब पहली ‘धूम’ आई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि एक चोर और पुलिस की लुका-छिपी दर्शकों के सिर चढ़कर बोलेगी. इस फिल्म सीरीज की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यहां दर्शक हीरो (अभिषेक बच्चन और उदय चोपड़ा) के लिए नहीं, बल्कि विलेन के लिए थिएटर जाते थे. जॉन अब्राहम की सादगी भरी क्रूरता से लेकर, ऋतिक रोशन के स्टाइल और आमिर खान के जुनून तक…हर बार विलेन ने हीरो के किरदार को छोटा साबित किया.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में शुरू से किसी भी फिल्म में हीरो को विलेन से ऊपर रखा गया, लेकिन साल 2004 में यशराज फिल्म्स और निर्देशक संजय गधवी ने इस प्रचलन को पूरी तरह से पलट दिया. ‘धूम’ एक ऐसी फिल्म बनकर उभरी जहां विलेन न सिर्फ स्मार्ट था, बल्कि वह हीरो से ज्यादा हैंडसम, स्टाइलिश और बुद्धिमान भी था. (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)

जब ‘धूम’ का पहला भाग आया तो अभिषेक बच्चन (एसीपी जय दीक्षित) और उदय चोपड़ा (अली) को मुख्य नायक के रूप में पेश किया गया, लेकिन जैसे ही स्क्रीन पर ‘कबीर’ के रूप में जॉन अब्राहम की एंट्री हुई, पूरा माहौल बदल गया. लंबे बाल, सुजुकी हायाबुसा बाइक और बिना किसी डर के आंखों में आंखें डालकर बात करने वाला यह विलेन दर्शकों को भा गया. (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)

जॉन अब्राहम ने विलेन को कूल बनाया. फिल्म के क्लाइमैक्स में जब वह अपनी बाइक के साथ खाई में कूदता है, तो दर्शकों की सहानुभूति पुलिस के बजाय उस चोर के साथ थी. इस फिल्म ने धीमी शुरुआत की थी, लेकिन वर्ड-ऑफ-माउथ के चलते यह सुपरहिट साबित हुई. इसने लगभग 29 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया, जो उस समय के बजट के हिसाब से एक बड़ी उपलब्धि थी.
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2 साल बाद यानी साल 2006 में ‘धूम 2’ आई. इस बार दांव बड़ा था. जॉन की जगह ऋतिक रोशन को लिया गया. ऋतिक ने ‘आर्यन’ उर्फ ‘मिस्टर ए’ के रूप में अभिनय की नई ऊंचाइयों को छुआ. उनके साथ ऐश्वर्या राय की जोड़ी ने ग्लैमर का तड़का लगाया. ऋतिक रोशन का डांस, उनके अलग-अलग भेष (जैसे बूढ़ा सफाईकर्मी या स्टैचू) और उनके हैरतअंगेज स्टंट्स ने अभिषेक बच्चन के किरदार को पूरी तरह से बैकसीट पर धकेल दिया.

फिल्म देखने वाले दर्शक यह भूल चुके थे कि वे एक अपराधी की कहानी देख रहे हैं, वे सिर्फ ऋतिक के स्वैग के दीवाने थे. फिल्म ने उस समय के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. भारत में करीब 81 करोड़ और वर्ल्डवाइड 150 करोड़ से ज्यादा कमाकर यह साल की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बनी.

फिर, साल 2013 में आदित्य चोपड़ा ने इस फ्रैंचाइजी को अगले स्तर पर ले जाने का फैसला किया और एंट्री हुई ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ आमिर खान की. विजय और समर के जुड़वा किरदारों में आमिर ने विलेन की परिभाषा ही बदल दी. फिल्म की पृष्ठभूमि शिकागो की थी और बजट पानी की तरह बहाया गया था. आमिर खान का किरदार विलेन से ज्यादा एक ‘एंटी-हीरो’ का था, जिसकी अपनी एक दुखद कहानी थी.

यहां भी जय अभिषेक बच्चन का किरदार केवल एक सहायक की भूमिका तक सीमित रह गया. पूरी फिल्म आमिर के इर्द-गिर्द घूमती रही. सर्कस के स्टंट्स और बीएमडब्ल्यू बाइक्स के एक्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. ‘धूम 3’ ने बॉलीवुड के इतिहास में नए पन्ने लिखे. यह पहली इंडियन फिल्म थी जिसने वर्ल्डवाइड 500 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार किया. भारत में इसने 284 करोड़ रुपये (नेट) की कमाई की और इसे ‘ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर’ का टैग मिला.

