Thursday, September 24, 2026
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नेपाल PM बालेन सोमवार को पहले भारतीय राजदूत से मिलेंगे: बाद में चीन के दूत से बात होगी, अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से वन-टू-वन बैठक




नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह सोमवार को सबसे पहले भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वे चीन के राजदूत झांग माओमिंग से बातचीत करेंगे। मंगलवार को शाह अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी स्कॉट अर्बोम से वन-टू-वन बैठक करेंगे। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के बाद यह पहली बार होगा, जब बालेन किसी विदेशी राजदूत से अकेले में मुलाकात करेंगे। इससे पहले वे विदेशी राजदूतों के साथ सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं।। एक ही दिन भारत और चीन के राजदूतों से बैठक के बाद अगले दिन अमेरिकी अधिकारी से बातचीत होगी। इन बैठकों में नेपाल के इन तीनों देशों के साथ रिश्तों और मौजूदा मुद्दों पर बात होने की संभावना है। दो हफ्ते पहले होनी थी मुलाकात, हिंसा के बाद टली शाह की इन राजदूतों से मुलाकात करीब दो हफ्ते पहले ही तय थी। लेकिन सुनसरी और दूसरे जिलों में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद कार्यक्रम टाल दिया गया था। अब सरकार ने फिर से इन मुलाकातों का कार्यक्रम बनाया है। प्रधानमंत्री के एक सलाहकार के मुताबिक, दोनों देशों के दूतावासों को मुलाकात का समय बता दिया गया है। शाह पहले अकेले में मुलाकात से बचते रहे प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह ने विदेशी राजदूतों और बड़े विदेशी अधिकारियों से अलग-अलग मुलाकात नहीं करने का तरीका अपनाया था। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी दूतावास की कई मुलाकात की रिक्वेस्ट भी नहीं मानीं। इनमें अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विशेष दूत सर्जियो गोर से मुलाकात शामिल थी। अमेरिकी विदेश विभाग की पब्लिक डिप्लोमेसी की अंडर सेक्रेटरी सारा बी. रोजर्स भी नेपाल दौरे पर आई थीं, लेकिन शाह से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बजाय शाह ने काठमांडू में तैनात कई देशों के राजदूतों के साथ साथ बैठकर बैठकें की थीं। ऐसी बैठकें 9 अप्रैल और 26 मई को हुई थीं। अकेले विदेशी राजदूतों से क्यों नहीं मिलते थे बालेन? बालेन की राजदूतों के साथ सामूहिक बैठक करने की नीति को नेपाल के कई राजनयिकों और विदेश नीति के जानकारों ने अच्छा कदम बताया था। उनका मानना था कि सभी राजदूतों से एक साथ मिलने पर किसी एक देश को ज्यादा तवज्जो देने का संदेश नहीं जाता। इससे नेपाल सभी देशों के साथ बराबरी का व्यवहार करता दिखता था और बातचीत भी ज्यादा साफ तरीके से होती थी। हालांकि, बाद में बालेन ने नेपाल के घरेलू मामलों से जुड़े लोगों से अलग-अलग मुलाकातें शुरू कर दीं। ऐसे में विदेशी राजदूतों के साथ भी पहले वाली सामूहिक बैठक की नीति को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल हो गया। 100 दिन बाद बालेन ने बदला अपना तरीका शाह की सरकार के 100 दिन पूरे होने के बाद उनके राजनीतिक सलाहकार आसिम शाह और दूसरे सलाहकारों ने उन्हें देश के अंदर भी अलग-अलग लोगों से मिलने की सलाह दी। इनमें कारोबारी, मीडिया से जुड़े लोग, ठेकेदार और दूसरे बड़े लोग शामिल थे। इसके साथ ही काठमांडू में तैनात विदेशी राजदूतों से भी अलग-अलग मुलाकात शुरू करने की तैयारी हुई। हाल के हफ्तों में शाह का तरीका बदला हुआ नजर आया है। वे अब अलग-अलग लोगों से मिलकर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने मधेश के राजनीतिक दलों और सांसदों के साथ बैठकें की हैं। इसके अलावा कारोबारियों, ठेकेदारों, उद्योगपतियों और निर्यातकों से भी अलग-अलग मुलाकात की है। अब विदेशी राजदूतों से वन-टू-वन मुलाकात भी इसी बदले हुए तरीके का हिस्सा मानी जा रही है।



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