मानसून से पहले शहर में जल निकासी की सुनिश्चित व्यवस्था के लिए नगर आयुक्त यशपाल मीणा द्वारा कई निर्देश दिए गए हैं। ज्ञान भवन और गांधी मैदान परिसर के अंदर स्थित नालों को ह्यूम पाइप बिछाकर जोड़ा जाएगा। नगर आयुक्त ने गुरुवार को वार्ड संख्या 24, 25, 26 और 27 का निरीक्षण किया। उन्होंने नौ संवेदनशील स्थलों पर जलनिकासी व्यवस्था की समीक्षा की। प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय और डीएम आवास के सामने जलनिकासी व्यवस्था की समीक्षा की गई। दरअसल, पटना में गुरुवार को हुई 1 घंटे की बारिश ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया। कई जगह निर्माण कार्य जारी रहने के कारण सड़कों पर जलजमाव और कीचड़ ने लोगों को काफी परेशान किया। सड़कों पर फिसलन होने से बाइक और स्कूटी सवार के एक्सीडेंट का भी खतरा बना रहा। क्राइस्ट चर्च स्कूल के पास भूमिगत नाले की होगी सफाई गांधी मैदान गेट संख्या-5 के सामने क्राइस्ट चर्च डायोसेसन स्कूल के निकट जलजमाव की स्थिति का भी निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान यह पाया गया कि भूमिगत नाले की सफाई की आवश्यकता है। नगर आयुक्त ने रात्रि में सड़क को नियंत्रित रूप से काटने, नाले की सफाई कराने और तत्पश्चात सड़क को पहले जैसा करने के निर्देश दिए, ताकि यातायात पर न्यूनतम प्रभाव पड़े और जलनिकासी व्यवस्था सुचारु हो सके। चैंबरों को आपस में लिंक करने के निर्देश बुद्धा कॉलोनी में एस.के. पुरी पार्क गेट संख्या-8 के सामने दोनों ओर बने चैंबरों को आपस में लिंक करने के निर्देश दिए गए ताकि जलनिकासी की क्षमता बढ़ाई जा सके। इसके अतिरिक्त पार्क के गेट संख्या-1 के सामने स्थित चैंबर को खुलवाकर नाले की उड़ाही की स्थिति की जांच की गई। नगर आयुक्त ने क्षेत्र में तुरंत जलनिकासी सुनिश्चित करने के लिए नाले पर ग्रेटिंग लगाने और आवश्यकतानुसार ह्यूम पाइप लगाने के निर्देश दिए। गड्ढे को लाल कपड़े से घेरने का निर्देश मोक्ष द्वार (बांस घाट) के सामने जलनिकासी की धीमी गति को लेकर अधिकारियों ने अवगत कराया कि क्षेत्र का नाला काफी पुराना है, जिसके कारण पानी निकलने में समय लगता है। नगर आयुक्त ने अभियंताओं को नाले की तकनीकी जांच कर बेहतर बनाने के लिए तत्काल कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। दुजरा स्थित श्रीराज अपार्टमेंट (टीसीएस ऑफिस) के समीप निरीक्षण के दौरान नाले के ध्वस्त होने तथा चैंबर के पास गड्ढा पाए जाने पर तत्काल गड्ढे को लाल कपड़े से घेरने, अस्थायी रूप से ह्यूम पाइप लगाकर जलनिकासी सुनिश्चित करने तथा शीघ्र गड्ढे को भरने के निर्देश दिए। बुडको के कर्मियों को वॉकी टॉकी से जोड़ा गया दूसरी ओर बुडको प्रबंध निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि शहर के सभी 91 ड्रेनेज पंपिंग स्टेशन (DPS) पर टीमें 24×7 अलर्ट मोड में तैनात रहेंगी। बुडको के कर्मियों को पटना नगर निगम के साथ समन्वय करके वॉकी टॉकी से जोड़ा गया है, जिससे कहीं परेशानी आने पर अलर्ट रहे। दोनों विभाग वॉकी टॉकी से जुड़े रहे। कंट्रोल रूम से सीधी मॉनिटरिंग हो रही पटना में वर्तमान में 56 स्थाई और 35 अस्थाई DPS पूरी तरह काम कर रही हैं। जल निकासी के लिए 364 हाई-कैपेसिटी पंप लगातार चलाए जा रहे हैं, जिनमें 265 विद्युत चालित और 99 डीजल पंप शामिल हैं। स्थाई DPS पर 256 पंप और अस्थाई DPS पर 83 पंपों ने बिना रुके काम किया। बुडको मुख्यालय के व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से हर DPS की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। कंट्रोल रूम से सीधी मॉनिटरिंग हो रही है। कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी- बुडको एमडी बुडको एमडी अनिमेष कुमार पराशर ने पदाधिकारियों को निर्देश देते हुये कहा कि, ‘मानसून के पूरे सीजन में जलजमाव से नागरिकों को राहत देना ही प्राथमिकता है। सभी DPS, पंप, बैकअप जेनरेटर और तकनीकी टीमें 24 घंटे अलर्ट पर रहे। इसमें किसी किस्म की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।’ इसके साथ ही बरसात के दौरान पंप वार प्रतिदिन हर घंटे का लेवल चेक कर मुख्यालय को सूचित करने का निर्देश दिया गया। मैदान में रहे वरिष्ठ अधिकारी बरसात शुरू होते ही बुडको की टीम अलर्ट हो फील्ड में सक्रिय हो गई। शहर के सभी 8 अंचलों – अजीमाबाद, कंकड़बाग, पटना सिटी, पटना पूर्वी, पाटलीपुत्रा, नूतन राजधानी, पटना पश्चिमी और बांकीपुर में नोडल पदाधिकारी व्यक्तिगत रूप से DPS पर मौजूद रहे। पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश था कि वे पंपों के इनलेट-आउटलेट फ्लो और वाटर लेवल की हर घंटे मॉनिटरिंग करें और किसी भी रुकावट पर तुरंत कार्रवाई करें। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी पदाधिकारियों को जियो टैग फोटो के साथ रियल-टाइम अपडेट साझा करने का निर्देश प्रबंध निदेशक द्वारा दिया गया था। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली को लेकर सख्ती दूसरी ओर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली के तहत पंजीकरण नहीं कराने वाले पर पटना नगर निगम कार्रवाई करेगा। पटना नगर निगम द्वारा अब तक शहर में कुल 53 थोक अपशिष्ट उत्पादकों की पहचान की जा चुकी है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में प्रति उल्लंघन ₹5,000 से ₹25,000 तक का जुर्माना निर्धारित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त लगातार नियमों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कचरा संग्रहण सेवा बंद करने, वैधानिक कार्रवाई प्रारंभ करने और अन्य दंडात्मक कदम भी उठाया जा सकता है।
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