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Success Story: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के टेकापार गांव की उद्यमी सोनी साहू ने सीताफल से आइसक्रीम बनाकर स्वरोजगार की मिसाल पेश की है. बरसात में सीताफल का पल्प सुरक्षित रखकर गर्मियों में उससे आइसक्रीम तैयार करती हैं. जानें इनके सफलता की कहानी…
Success Story: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक घरेलू कामों से आगे बढ़कर स्वरोजगार की नई मिसाल पेश कर रही हैं. इसी कड़ी में बालोद जिले के टेकापार गांव की रहने वाली उद्यमी महिला सोनी साहू अपनी अनोखी पहल से चर्चा में हैं. सोनी ने सीताफल जैसे मौसमी फल को आय का जरिया बनाकर एक अलग पहचान बनाई है. वे सीताफल से आइसक्रीम तैयार कर बाजार में बेच रही हैं, जिसकी मांग गर्मी के दिनों में तेजी से बढ़ जाती है.
स्टोर कर लेती हैं सीताफल
सोनी साहू लोकल18 को बताती हैं कि बरसात के मौसम में सीताफल की अच्छी आवक होती है. इसी दौरान वे स्थानीय बाजार से सीताफल खरीदकर उसे सुरक्षित स्टोर कर लेती हैं. बाद में उसका पल्प निकालकर संरक्षित रखती हैं, ताकि गर्मी के सीजन में इसका उपयोग किया जा सके. यही पल्प उनकी खास सीताफल आइसक्रीम की मुख्य सामग्री होता है.
ऐसे तैयार करतीं आइसक्रीम
आइसक्रीम बनाने की प्रक्रिया के बारे में सोनी बताती हैं कि 2 किलो सीताफल पल्प में 1 किलो क्रीम और दूध पाउडर मिलाया जाता है. इसके बाद सभी सामग्री को अच्छी तरह मिक्स कर छोटे-छोटे डिब्बों में भरकर ठंडा होने के लिए रखा जाता है. तैयार होने के बाद इन्हें बाजार में बिक्री के लिए भेजा जाता है. उनके द्वारा तैयार किया गया एक छोटा डिब्बा सीताफल आइसक्रीम 20 रुपये में बिकता है. गर्मी के मौसम, जन्मदिन पार्टी, पारिवारिक आयोजनों और छोटे कार्यक्रमों में इस आइसक्रीम की काफी मांग रहती है. खास बात ये कि स्वाद के साथ यह स्थानीय और प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण लोगों को ज्यादा पसंद आता है.
सुशासन तिहार में मुनाफा
सोनी का कहना है कि देसी स्वाद और ताजगी ही उनके उत्पाद की सबसे बड़ी खासियत है. बताया कि सुशासन तिहार के दौरान उन्होंने 6 अलग-अलग शिविरों में अपने सीताफल आइसक्रीम का स्टॉल लगाया था. हर शिविर से उन्हें करीब 1000 रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ. इस तरह उन्होंने कुल मिलाकर अच्छी आमदनी हासिल की.
प्रशिक्षण भी दे रहीं
पहले घर में सिलाई का काम करने वाली सोनी साहू आज एक सफल महिला उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं. सीताफल आइसक्रीम के अलावा वे अरहर दाल, पापड़, बड़ी और आचार जैसे घरेलू उत्पाद भी तैयार कर बेचती हैं. इतना ही नहीं, वे अन्य महिलाओं को भी इस काम का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने की राह दिखा रही हैं. उनकी यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

