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Mutation vs Registry : क्या आपको भी रजिस्ट्री और दाखिल खारिज को लेकर कोई कंफ्यूजन है तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इन दोनों बातों को पूरी तरह क्लीयर कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी के पास म्यूटेशन दस्तावेज नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि वह अपनी संपत्ति को बेच नहीं सकता है. वैलिड सेल डीड ही मालिकाना हक को डिसाइड करने के लिए काफी है.
रजिस्ट्री और म्यूटेशन दोनों ही प्रॉपर्टी के लिए जरूरी होते हैं.
नई दिल्ली. प्रॉपर्टी खरीदने वालों को एक चीज को लेकर हमेशा कंफ्यूजन रहती है कि बिना दाखिल खारिज कराए जमीन या मकान की रजिस्ट्री पर्याप्त नहीं होती है. ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि अगर प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज यानी म्यूटेशन न कराया जाए तो सिर्फ उसकी रजिस्ट्री से पूरा मालिकाना हक नहीं मिलेगा. लेकिन, आपकी इस कंफ्यूजन को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह खत्म कर दिया है. शीर्ष अदालत ने अपने एक फैसले में कहा है कि अगर दाखिल खारिज नहीं है तो भी सेल डीड यानी रजिस्ट्री बेकार नहीं मानी जाएगी और मालिकाना हक को बनाए रखा जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने साल समीउल्लाह वर्सेज स्टेट ऑफ बिहार, 2025 ( Samiullah vs State of Bihar, 2025) के मामले में रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज पर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेचना चाहता है तो उसे म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज का प्रूफ देना जरूरी नहीं है. बिना इस दस्तावेज के भी वह व्यक्ति अपने मालिकाना हक वाली प्रॉपर्टी को बेचने का अधिकार रखता है. कोर्ट ने साफ किया है कि रजिस्ट्री और दाखिल खारिज दोनों अलग-अलग चीजें हैं और इन दोनों को एकसाथ नहीं मिलाया जा सकता है.
क्या है रजिस्ट्री का मतलब
कोर्ट के फैसले से जाहिर होता है कि किसी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री यानी सेल डीड उसके टाइटल का ट्रांसफर होती है. इस प्रक्रिया में किसी प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक रखने वाला व्यक्ति अपने टाइटल को दूसरे के नाम पर ट्रांसफर कर देता है. सेल डीड यानी रजिस्ट्री एक तरह से टाइटल डॉक्यूमेंट है और संपत्ति के मामले में यही सबसे जरूरी दस्तावेज माना जाता है. अगर किसी के पास वैलिड रजिस्ट्री है तो वही संबंधित संपत्ति का मालिक होगा, भले ही उसने अपनी प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज नहीं कराया है.
क्या होता है म्यूटेशन
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में म्यूटेशन को भी पूरी तरह क्लीयर कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज किसी संपत्ति पर मालिकाना हक को डिफाइन नहीं करते हैं. यह सिर्फ रेवेन्यू अथवा म्यूनिसिपल रिकॉर्ड है, जो किसी तरह के मालिकाना हक का निर्णय नहीं करता है. लिहाजा अगर किसी व्यक्ति के पास म्यूटेशन का पेपर नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि संबंधित प्रॉपर्टी पर उसका मालिकाना हक नहीं रहेगी. उसकी वैलिड सेल डीड ही मालिकाना हक को डिसाइड करने के लिए काफी है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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