क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 18 जून 2018 को शिवपुरी के दिनारा इलाके में सड़क किनारे पीली बोरी में बंद एक युवक की सड़ी-गली लाश मिली थी।
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शव के पास फ्रिज के कार्टन पर लिखा एक मोबाइल नंबर पुलिस को झांसी तक ले गया, लेकिन कई महीनों की जांच के बाद भी मृतक की पहचान नहीं हो सकी।
करीब 10 महीने बाद झांसी में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट से पता चला कि शव रेलवे से रिटायर राधारमण भारद्वाज के बड़े बेटे रिंकू का है।
पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि रिंकू की हत्या उसके अपने घर में हुई थी। जिस बेड के नीचे बॉक्स में उसकी लाश छिपाई गई, उसी पर उसकी पत्नी हेमलता ने प्रेमी के साथ रात बिताई।
सुबह शव को कार्टन में पैक कर दूसरे जिले में फेंक दिया गया। करीब एक साल तक पुलिस को उलझाने वाले इस केस में आखिरकार कार्टन पर लिखा मोबाइल नंबर ही अहम सुराग बना। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
रिंकू की पहचान होने के बाद पुलिस ने परिवार के लोगों से पूछताछ शुरू की। सामने आया कि उसके पिता राधारमण रेलवे में नौकरी करते थे। पहली पत्नी की मौत के बाद उन्होंने दूसरी शादी की थी। रिंकू पहली पत्नी का बेटा था, जबकि दूसरी पत्नी से एक बेटा और एक बेटी थे। राधारमण ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर अपनी सरकारी नौकरी छोटे बेटे रोहित को दिलवा दी थी। रिंकू की पत्नी हेमलता उर्फ आरती इस फैसले से नाराज थी।
देरी से रिपोर्ट पर पुलिस को संदेह
तनाव बढ़ने पर राधारमण ने रिंकू और हेमलता को अपना मकान दे दिया था। वे दूसरी पत्नी और बच्चों के साथ अलग किराए के मकान में रहने लगे।
परिवार के बीच बातचीत कम हो गई थी। रिंकू ड्राइविंग के काम से अक्सर बाहर रहता था। ऐसे में उसके कई महीनों तक घर नहीं लौटने पर भी शुरुआत में किसी ने गंभीरता से तलाश नहीं की।
लेकिन पुलिस के सामने एक सवाल था- रिंकू की हत्या जून 2018 में हो चुकी थी, फिर हेमलता ने जनवरी 2019 में गुमशुदगी की रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई?
कार्टन का सुराग पहुंचा उसी घर के पास
पुलिस ने झांसी में रिंकू के घर के आसपास रहने वालों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान फ्रिज के कार्टन का सुराग फिर अहम साबित हुआ।
पता चला कि जिस कमरे तक कार्टन पर लिखे मोबाइल नंबर की जांच पहुंची थी, वहां अरमान नाम का युवक बेकरी चलाता था। यह बेकरी रिंकू और हेमलता के घर से लगी हुई थी।
अरमान बेकरी के लिए रिंकू के घर से पानी लाता था। बिजली का तार भी उसी घर से खींच रखा था। इस वजह से उसका घर में आना-जाना सामान्य हो गया था।

घर के अंदर हुई हत्या, बेड के बॉक्स में छिपाया शव
रिंकू को जब पत्नी और अरमान के संबंधों के बारे में पता चला तो घर में विवाद होने लगा। पुलिस के मुताबिक, इसी तनाव के बीच हेमलता और अरमान ने मिलकर रिंकू की हत्या की साजिश रची।
पुलिस की जांच के मुताबिक, 14 जून 2018 की रात अरमान रिंकू के घर पहुंचा। वहां उसने चाकू से रिंकू पर कई वार किए। गर्दन पर हुए हमलों और अत्यधिक खून बहने से उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद दोनों ने शव को चादर में लपेटकर बोरी में भर दिया और डबल बेड के बॉक्स में छिपा दिया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद अरमान और हेमलता ने उसी बेड पर रात बिताई।
मोपेड पर कार्टन में शव लेकर निकला
सुबह शव को ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू हुई। अरमान अपनी बेकरी से फ्रिज और बिस्कुट के कार्टन लेकर आया। शव को बोरी समेत कार्टन में पैक किया और मोपेड पर रखकर वहां से निकल गया।
बेकरी के काम के चलते उसका कार्टन लेकर आना-जाना आम बात थी। किसी को शक नहीं हुआ। वह शव को शिवपुरी जिले के बरकुआं गांव के हनुमान मंदिर के पास सड़क किनारे फेंक आया।

पेंट, चाकू और बेड की प्लाई से मिले अहम सबूत
हत्या के करीब एक साल बाद पुलिस ने 1 जून 2019 को हेमलता और अरमान को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने अरमान की बेकरी की दीवार से पेंट का नमूना लिया।
जांच में कार्टन पर लगे हरे पेंट और बेकरी की दीवार पर इस्तेमाल किए गए पेंट में समानता सामने आई। पुलिस को रिंकू के घर में रखे डबल बेड की प्लाई पर भी खून के निशान मिले।
चाकू, मोपेड और बेड से जुड़े साक्ष्यों को भी अहम माना गया। जिस बेड के बॉक्स में शव छिपाया गया था, उसकी प्लाई पर मिले खून के निशान जुर्म को साबित करने के लिए अहम सबूत बन गए।
अदालत में 24 गवाहों ने क्या बताया?
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 24 गवाह पेश किए। रिंकू के पिता राधारमण ने परिवार में नौकरी और संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद की जानकारी दी। छोटे भाई रोहित ने भी रिंकू और हेमलता के बीच होने वाले झगड़ों तथा अरमान के घर आने-जाने की बात अदालत में बताई।
रिंकू के रिश्तेदार श्याम भारद्वाज ने बताया कि जनवरी 2019 में वह झांसी में एक शादी में शामिल होने आया था। इस दौरान वह हेमलता के घर गया, जहां उसने एक युवक को बैठे देखा। पूछने पर हेमलता ने बताया कि वह अरमान है और बेकरी चलाता है।

बचाव पक्ष के सवाल, अदालत का फैसला
बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए। उसका तर्क था कि हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। डीएनए जांच से मृतक की पहचान का निर्णायक वैज्ञानिक मिलान भी नहीं हुआ था। कुछ गवाहों के बयान परिस्थितिजन्य थे।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूरे घटनाक्रम और सबूतों का परीक्षण किया। शव की पहचान, घर के भीतर मिले खून के निशान, चाकू पर खून, कार्टन और बेकरी की दीवार के पेंट की समानता तथा गवाहों के बयानों को एक साथ देखा गया।
13 मई 2024 को अदालत ने अरमान उर्फ रिंकू खान और हेमलता उर्फ आरती उर्फ वेटू शर्मा को दोषी ठहराया। दोनों को आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।
क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें…
100 किमी दूर सड़क किनारे बोरी में फेंकी लाश

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में इस बार कहानी शिवपुरी के एक ऐसे हत्याकांड की, जिसकी गुत्थी सुलझाने में पुलिस को करीब एक साल लग गए। सड़क किनारे मिली लाश के पास फ्रिज के कार्टन और उस पर लिखा एक मोबाइल नंबर पुलिस के हाथ लगा। पढ़ें पूरी खबर…

