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नई दिल्ली4 मिनट पहले
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मनरेगा को 2005 में लागू किया गया था।
महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट का नाम अब पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना होगा। शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट ने एक्ट का नाम बदलने और काम के दिनों की संख्या बढ़ाने वाले बिल को मंजूरी दे दी। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से बताया कि काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी।
महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम को MGNREGA (मनरेगा) या NREGA (नरेगा) के नाम से जाना जाता है। यह सरकार की एक खास स्कीम है जिसका मकसद ग्रामीण इलाकों में परिवारों की रोजी-रोटी की सुरक्षा बढ़ाना है।
इसके तहत हर उस परिवार को एक फाइनेंशियल ईयर में कम से कम 100 दिनों की गारंटी वाली मजदूरी वाला काम दिया जाता है, जिसके बड़े सदस्य बिना हुनर का काम करने के लिए अपनी मर्जी से तैयार होते हैं। इसे 2005 में लागू किया गया था।

कांग्रेस बोली- मोदी सरकार ने 32 योजनाओं के नाम बदले
कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने मनरेगा का नाम बदले जाने पर एक वीडियो शेयर किया। जिसमें उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने MGNREGA का नाम बदल कर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार स्कीम रखा है। इसी मनरेगा को मोदी कांग्रेस की विफलताओं का पुलिंदा बताते थे लेकिन असलियत यह है कि यही मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी साबित हुआ।
कांग्रेस की स्कीमों का नाम बदल कर उनको अपना बना लेने की मोदी जी की यह लत बड़ी पुरानी है यही तो किया है उन्होंने 11 साल, UPA की स्कीमों का नाम बदल अपना ठप्पा लगा कर पब्लिसिटी करना।

विपक्ष बोला- फ्रस्टेशन के कारण नाम बदले जा रहे
केंद्र सरकार के MGNREGA का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोज़गार योजना करने की खबरों पर शिवसेना (UBT) की MP प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा- फ्रस्ट्रेशन की वजह से ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं। यह ध्यान भटकाने का एक और तरीका है।
वंदे मातरम पर चर्चा से जनता को समझ आ गया है कि इतिहास का वॉट्सएप वर्जन कौन सा है और असली वर्जन कौन सा है। इसलिए जो लोग वॉट्सएप वर्जन पर यकीन करते हैं, वे गांधी परिवार से नाराज होंगे। जो लोग सच्चा इतिहास जानते हैं, वे गांधी परिवार के योगदान के लिए हमेशा उनका सम्मान करेंगे।

