यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और सहारनपुर के डीएम अरविंद चौहान को क्रिमिनल बोलने वाली हुदा जरीवाला फिर से विवादों में घिर गई है। उन्होंने अब अपने धर्म को लेकर हो बयान दे दिया है। जिसको लेकर देवबंदी उलेमा कारी इसहाक गोरा ने उनको नसीहत दी है। दरअसल, हुदा जरीवाला का एक पॉडकास्ट में दिया गया बयान धार्मिक चर्चा का विषय बन गया है। 9 अक्टूबर को दिए गए बयान में हूदा जरीवाला एंकर के सवाल का जवाब देते हुए कहती नजर आईं, “मर्द को जहां सत्तर हूरें मिलेंगी, तो औरतों को भी सत्तर मर्द मिलेंगे।” उनके इस बयान को लेकर दीन के मसलों पर जानकारी, धार्मिक मान्यताओं की समझ और बिना प्रमाणिक आधार के टिप्पणी करने की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। देवबंदी उलेमा कारी इसहाक गोरा ने कहा कि धार्मिक विषयों पर अपनी राय रखने से पहले उनके बारे में सही जानकारी हासिल करना जरूरी है। संदेश में कहा गया है कि दीन को व्यक्तिगत इच्छाओं, अनुमानों या अपनी सोच के आधार पर नहीं समझा जा सकता। इसके लिए सही ज्ञान और प्रमाणिक धार्मिक तर्कों की आवश्यकता होती है। ‘दीन के मसले में बोलने से पहले इल्म हासिल करना जरूरी’ कारी इसहाक गोरा ने हूदा जरीवाला के बयान को लेकर जारी संदेश में कहा गया है कि धार्मिक विषयों पर इस तरह की बातें कहना केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि एक गंभीर विषय पर बिना पर्याप्त जानकारी के राय रखने का मामला है। किसी भी धार्मिक मान्यता पर बात करते समय उसके मूल आधार और प्रमाणों को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धर्म से जुड़े सवालों पर चर्चा करना गलत नहीं है। सवाल पूछने से जानकारी बढ़ती है और किसी विषय को समझने का अवसर मिलता है। हालांकि, जब किसी व्यक्ति को किसी धार्मिक मसले की सही जानकारी न हो, तो उसे निश्चित और अंतिम निष्कर्ष के रूप में अपनी बात रखने से बचना चाहिए। ‘बिना इल्म के जवाब देना गलतफहमी फैला सकता है’ संदेश में लोगों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी धार्मिक विषय की प्रमाणिक जानकारी नहीं है, तो उस पर निर्णायक अंदाज में टिप्पणी करने से परहेज करें। बिना पर्याप्त ज्ञान के दिए गए जवाब लोगों के बीच भ्रम पैदा कर सकते हैं और किसी धार्मिक मान्यता को लेकर गलतफहमी बढ़ा सकते हैं। इसमें कहा गया है कि धार्मिक विषयों पर विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। किसी सवाल का जवाब देने से पहले उसके बारे में सही जानकारी जुटाना और प्रमाणिक आधार को समझना जरूरी है। केवल अनुमान या व्यक्तिगत सोच के आधार पर किसी धार्मिक विषय के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता। ‘हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं’ कारी इसहाक गोरा ने कहा कि हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं है। यदि किसी विषय की जानकारी नहीं है, तो उसे स्वीकार करना भी जिम्मेदारी का हिस्सा है। खासकर धर्म से जुड़े मामलों में किसी बात को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले उसके प्रमाण और संदर्भ को समझना चाहिए। हूदा जरीवाला के बयान के बाद सामने आए इस संदेश में लोगों को नसीहत दी गई है कि धार्मिक मामलों में बोलते समय सावधानी बरतें। किसी विषय पर सवाल उठाना या चर्चा करना गलत नहीं है, लेकिन बिना पर्याप्त जानकारी के जवाब देना गलतफहमी का कारण बन सकता है। धार्मिक विषयों पर चर्चा के बीच यह मामला इस सवाल को सामने लाता है कि सार्वजनिक मंचों और पॉडकास्ट में धर्म से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते समय जानकारी, संदर्भ और जिम्मेदारी का कितना ध्यान रखा जाना चाहिए।
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मर्दों को 70 हूरें…औरतों को भी 70 मर्द मिलेंगे: हुदा जरीवाला के बयान पर देवबंदी उलेमा बोले– दीन के मसलों पर बिना प्रमाणिक जानकारी के टिप्पणी नहीं करनी चाहिए – Saharanpur News
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