बच्चे के जन्म के बाद से ही एक नई मां को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है। जिसमें पोस्टपार्टम डिप्रेशन पहले नंबर पर है। इस समस्या से निपटने के लिए क्या मेडिटेशन मददगार साबित होगा? गुरुदेव ने इस सवाल का जवाब दिया है।
जब कोई महिला पहली बार मां बनती है तो उसका एहसास काफी अलग होता है। ये एहसास पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरीके से हो सकता है। दरअसल, एक नई मां बच्चे के जन्म के बाद होने वाले पोस्ट पार्टम डिप्रेशन से जूझती है। ये एक सामान्य लेकिन गंभीर मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम है। जिसकी वजह से रोने जैसा महसूस होता है। कुछ महिलाएं तुरंत इससे रिकवर हो जाती हैं लेकिन कुछ को इसके गंभीर लक्षणों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में क्या मेडिटेशन मददगार साबित हो सकता है? आइए जानते हैं।
क्या नई मां के लिए फायदेमंद है मेडिटेशन?
बच्चों की डॉक्टर माधवी भारद्वाज ने गुरुदेव से सवाल किया कि जब कोई महिला मां बनती है तो वह पोस्टपार्टम डिप्रेशन से जूझती है ऐसे में क्या मेडिटेशन उनके लिए मददगार साबित हो सकता है। जिसका जवाब देते हुए गुरुदेव कहते हैं कि नई मां के लिए ध्यान बहुत ज्यादा मददगार साबित हो सकता है। दुनियाभर में लोगों को ध्यान लगाने से फायदा मिला है। इससे डिप्रेशन की समस्या दूर हो जाती है। शरीर के अलग-अलग तरह के दर्दों से निपटने में भी ये फायदेमंद साबित होता है। वहीं जब कोई मेडिटेशन करता है तो मन खुश रहता है और शरीर के तरंग अच्छे/पॉजिटिव हो जाते हैं। जब आप इसकी शुरुआत करते हैं तो आप हर चीज को एक पॉजिटिव नजरिए से देखने लगते हैं।
गुरुदेव कहते हैं कि आजकल जिस तरह से आत्महत्या की प्रवृत्ति के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। वह कहते हैं कि आजकल दुनिया में जितने मामले आत्महत्या के हो रहे हैं उनमें सबसे ज्यादा भारत में हो रहे हैं। गुरुदेव कहते हैं कि जब आप प्राणायाम करते हैं तो ये सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं। वह कहते हैं कि आप किसी भी धर्म के हो ध्यान हर किसी के लिए मददगार साबित होता है और ये बहुत जरूरी है।
नई मां के लिए मेडिटेशन करने का आसान तरीका
-मेडिटेशन के लिए आराम से बैठ जाएं। जरूरी नहीं है कि आप पैरों को फोल्ड करें नॉर्मल डिलेवरी वाली महिलाएं पैर फैलाकर ही बैठें।
-आंखें बंद करके धीरे-धीरे सांस लें। सांस लेते समय ध्यान रखएं कि 4 सेकंड में अंदर, 6 सेकंड में बाहर छोड़नी है।
-अपना ध्यान सांस पर रखें। अगर कोई विचार आएं तो उन्हें रोकने की कोशिश न करें, बस ध्यान वापस सांस पर ले आएं।
– 5 मिनट बाद धीरे से आंखें खोलें और शरीर को आराम दें।
टिप- बच्चे के सोने के समय करना सुविधाजनक हो सकता है।

