महिलाओं से घिरी शहीद की मां बार-बार बेसुध हो रही थी। पास में बहू थी, जो लगातार पति को याद कर रही थी। शहीद की मां कभी खुद को तो कभी अपनी बहू को संभाल रही थी। उधर, घर के बरामदे में गांव के लोगों के साथ शहीद का चार साल का बेटा ‘शहीद’, ‘शहादत’ से अनजान ख
.
शुक्रवार दोपहर बाद जब शहीद अंकित की अंतिम यात्रा निकली, तो इससे पहले उनके अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को कौफिन में रखा गया। इस दौरान जब सलामी देने की बारी अंकित की पत्नी की आई तो हाथों में मेंहदी लगाई और लाल जोड़े में पहुंची रूबी कुमारी ने पहले पति को सलामी दी, फिर कौफिन से लिपटकर रोने लगी। उन्हें बार-बार पीछे किया जा रहा था, हटाया जा रहा था, लेकिन रूबी पति के पार्थिव शरीर से अलग नहीं होना चाह रही थी।
शहीद की पत्नी की जीफ लाल जोड़े में लगाना है
शहीद अंकित भागलपुर के नवगछिया के चापर गांव के रहने वाले थे। शहीद जवान के बड़े भाई निरंजन यादव ने बताया, ‘अंकित 2009 में सेना में भर्ती हुए थे। बचपन से ही उनका सपना था कि वे सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करें। भाई के शहीद होने पर दुख तो है, लेकिन यह हमारे परिवार और जिले के लिए गर्व की बात है।’
भाई ने कहा, ‘छोटे भाई की शहादत पर मुझे गर्व है। एक माह पहले अंकित छुट्टी पर घर आए थे और 15 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। एक महीने पहले मेरठ से ट्रांसफर होकर कश्मीर गए थे।’
2017 में हुई थी शहीद अंकित की शादी
शहीद अंकित यादव की शादी वर्ष 2017 में कटिहार जिले के काढ़ा गोला की रहने वाली रूबी कुमारी से हुई थी। उनके दो बेटे हैं- उत्कर्ष (4) और उपांश (2)।
पत्नी बच्चों के साथ कटिहार में रहती हैं। उनकी शहादत की सूचना मिलने पर दोपहर बाद रूबी के भाई कटिहार से उन्हें अपने घर ले गए हैं।
शहीद के बेटे का जीफ लगवाना है।
बड़े भाई भी आर्मी में थे
अंकित 4 भाइयों में सबसे छोटे थे। पिता लक्ष्मी यादव किसान हैं। माता सविता देवी गृहिणी हैं। सबसे बड़े भाई निरंजन सेना में JCO के पद से रिटायर हुए हैं। फिलहाल झारखंड के सैप में नियुक्त हैं। निरंजन ने बताया कि वह घर के लिए रवाना हो चुके हैं।
मंझले भाई मिथिलेश यादव RPF में एसआई हैं और पटना के बख्तियारपुर में तैनात हैं। तीसरे भाई मुकेश यादव आर्मी से रिटायर्ड हैं। रिटायर होने के बाद मुकेश यादव पूर्णिया में शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं।
बाढ़ की वजह से गाड़ी गांव में नहीं आ पाई। जवान के पार्थिव शरीर को कंधे पर रखकर घर तक लाया गया।
13 अगस्त को शहीद हुए थे अंकित यादव
12 अगस्त की रात कश्मीर में अचानक आतंकियों की ओर से फायरिंग होने लगी। सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की, इस दौरान आतंकियों की गोली अंकित को लग गई, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
जख्मी हालत में पहले AIP-06 और फिर देवी पोस्ट लाया गया। बटालियन के RMO (रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर) ने ढाई घंटे तक उनका इलाज किया। इलाज के दौरान बुधवार सुबह 6:15 बजे दम तोड़ दिया।
सेना के अधिकारियों ने उनकी शहादत की सूचना बुधवार सुबह 10 बजे बड़े भाई निरंजन यादव को दी। जवान के घर में बूढ़ी मां सविता देवी और पिता लक्ष्मी यादव हैं।

