Saturday, September 12, 2026
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रिजर्व बैंक ने दिया टाटा समूह को बड़ा झटका, शेयर बाजार निवेशकों के आने वाले अच्छे दिन


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RBI vs Tata Sons : रिजर्व बैंक ने टाटा संस की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने खुद को एनबीएफसी की लिस्ट से बाहर रखने की गुहार लगाई थी. कंपनी ने कहा था कि वह अपना एनबीएफसी लाइसेंस भी सरेंडर करना चाहती है, लेकिन आरबीआई ने इससे साफ इनकार कर दिया और कहा कि टाटा संस को एनबीएफसी की कैटेगरी में ही रखा जाएगा.

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आरबीआई ने टाटा संस को अपर लेयर की एनबीएफसी लिस्ट में रखा है.

नई दिल्ली. करीब तीन साल से चल रही रस्साकसी में आखिरकार रिजर्व बैंक ने टाटा समूह को तगड़ा झटका दे दिया है. आरबीआई ने टाटा संस की उस अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें समूह ने अपना गैर बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) का रजिस्ट्रेशन सिर्टफिकेट सरेंडर करने की अपील की थी. आरबीआई के फैसले का मतलब है कि अब टाटा संस को खुद को शेयर बाजार में लिस्ट कराना ही पड़ेगा. कंपनी ने यह अर्जी इसलिए दी थी कि उसका एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर हो जाए तो शायद उसे आरबीआई के नियमों से राहत मिल जाएगी और खुद को लिस्ट नहीं कराना पड़ेगा.

CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आरबीआई के इस फैसले से टाटा संस को तगड़ा झटका लगा है. उसकी अपील रिजेक्ट होने का सीधा मतलब है कि अब समूह को आरबीआई के उन नियमों का पालन करना ही पड़ेगा, जो उसने अपर लेयर एनबीएफसी के लिए बनाया है. इस नियम के तहत सभी अपर लेयर की एनबीएफसी को शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी है. टाटा संस ने मार्च, 2024 में ही आरबीआई के पास अपना कोर इंवेस्टमेंट कंपनी (CIC) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का आवेदन दिया था. इसके लिए कंपनी ने बाकायदा 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज भी चुका दिया था.

अपर लेयर एनबीएफसी बनी रहेगी टाटा संस
रिजर्व बैंक ने साफ कह दिया कि है कि टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी फ्रेमवर्क में ही रखा जाएगा. अगस्त, 2026 में भी आरबीआई ने टाटा संस को देश की 17 अपर लेयर वाली एनबीएफसी की लिस्ट में शामिल रखा था. तब भी आरबीआई ने कहा था कि उसका रजिस्ट्रेशन खारिज करने का आवेदन फिलहाल समीक्षाधीन है और इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा. अब करीब महीनेभर बाद आरबीआई ने साफ कर दिया है कि टाटा संस को अपर लेयर की एनबीएफसी वाली कैटैगरी में ही रखा जाएगा.

टाटा संस कब बनी एनबीएफसी
रिजर्व बैंक ने सितंबर, 2022 में ही टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी के तौर पर क्लासीफाई किया था. शुरुआती फ्रेमवर्क में आरबीआई ने कहा था कि टाटा संस को तीन साल के भीतर लिस्ट कराना जरूरी होगा. इस लिहाज से आरबीआई की डेडलाइन तो सितंबर, 2025 में ही बीत चुकी है. इस डेडलाइन के भी एक साल बाद तक टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग नहीं हुई है. कंपनी अभी तक इसी कोशिश में है कि उसका एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करके उसे लिस्टिंग से छूट दे दी जाए.

टाटा संस लपेटे में क्यों आई और इसके क्या मायने
आरबीआई ने 4 साल पहले जब एनबीएफसी का फ्रेमवर्क बनाया था तो यह तय किया था कि जिसका बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ से ज्यादा है, उन एनबीएफसी को शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी होगा. ऐसी कंपनियों को अपर लेयर एनबीएफसी घोषित किया गया था. टाटा संस का मार्केट कैप तो इस लिमिट से भी काफी ज्यादा है, लिहाजा आरबीआई ने इसे भी लिस्ट में शामिल कर लिया था. टाटा संस, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसकी टाटा ट्रस्ट में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. अगर यह कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होती है तो निवेशकों को पैसे कमाने का एक अच्छा साधन मिल सकता है, क्योंकि इस कंपनी का आकार काफी बड़ा है और इसका आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ भी बन सकता है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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