Tuesday, July 14, 2026
Homeराज्यमध्यप्रदेश'लापता लड़कियों को ढूंढने में पुलिस गंभीर नहीं': हाईकोर्ट ने लगाई...

‘लापता लड़कियों को ढूंढने में पुलिस गंभीर नहीं’: हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- जांच अधिकारियों को सिर्फ फेसबुक-इंस्टाग्राम का ही पता – Gwalior News




मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य में लापता लड़कियों और गुमशुदा इंसानों की बरामदगी को लेकर पुलिस प्रशासन के ढीले रवैये पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि पुलिस ऐसे मामलों को अत्यंत हल्के में ले रही है और जांच का जिम्मा ऐसे लापरवाह और अक्षम अधिकारियों को सौंप दिया जाता है, जिन्हें आधुनिक या प्रभावी तफ्तीश का ककहरा तक नहीं मालूम। भिंड के आलमपुर थाने में दर्ज एक गुम इंसान मामले में गंभीरता से कार्रवाई नहीं करने के केस पर हाईकोर्ट की डबल बेंच सुनवाई कर रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने भिंड एसपी को वर्तमान जांच अधिकारी को तत्काल हटाने और मामले की कमान ‘अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक’ स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने के कड़े निर्देश दिए हैं। ASI बोले- इंस्टाग्राम-फेसबुक देख लिया, सुराग नहीं मिला यह पूरा मामला भिंड जिले के आलमपुर थाने से जुड़ा है, जहां एक पिता ने अपनी लापता बेटी की बरामदगी के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच के समक्ष आलमपुर थाने में तैनात एएसआई ओंकार सिंह तोमर केस डायरी लेकर व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे। कोर्ट ने जब उनसे लड़की की तलाश को लेकर किए गए प्रयासों पर सवाल दागे, तो एएसआई को जवाब देते नहीं बना। उन्होंने अदालत को बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि ‘मैंने लड़की का इंस्टाग्राम और फेसबुक खंगाला है, लेकिन वहां कोई सुराग नहीं मिला।’ वैसे, संदिग्ध को गांव में ही देखा गया था।” 24 घंटे के भीतर जांच अधिकारी को हटाएं इस पर कोर्ट ने काफी नाराजगी जताई और कहा कि विवेचना अधिकारी सिर्फ फेसबुक व इंस्टाग्राम तक ही सीमित हैं। ASI के इस जवाब पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आईओ जांच करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। क्या पुलिस की तफ्तीश अब सिर्फ सोशल मीडिया स्क्रॉल करने तक सीमित रह गई है? बेंच ने सख्त संदेश देते हुए निर्देशित किया है। भिंड एसपी से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा हाईकोर्ट ने केवल निचले स्तर के अधिकारी को ही नहीं, बल्कि भिंड पुलिस अधीक्षक को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसपी खुद जांच अधिकारियों की सक्षमता को परखे बिना ही लापरवाही से केस सौंप रहे हैं। अदालत ने भिंड एसपी से अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा मांगते हुए 3 बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments