Wednesday, April 22, 2026
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‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ पर मंडराया कानूनी संकट, कांग्रेस सांसद ने ओटीटी प्लेटफॉर्म को भेजा नोटिस


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कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के खिलाफ ओटीटी प्लेटफॉर्म को कानूनी नोटिस भेजकर इसके प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की है. उनका तर्क है कि गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर आधारित यह सीरीज अपराधियों का महिमामंडन करती है, जो युवाओं को गलत राह पर धकेल सकती है. अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने चिंता जताई है कि पंजाब के संवेदनशील माहौल में ऐसे कॉन्टेंट से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और ‘नायक-पूजा’ को बढ़ावा मिल सकता है.

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लॉरेंस बिश्नोई पंजाब युनिवर्सिटी का छात्र था.

नई दिल्ली: मुंबई के लुधियाना से कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने वाली नई डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ को लेकर मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने प्लेटफॉर्म को बाकायदा कानूनी नोटिस भेजकर इस सीरीज के प्रसारण पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है. मरिंदर सिंह राजा वारिंग का तर्क है कि यह वेब सीरीज गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की जिंदगी पर आधारित है, जिस पर कई गंभीर आपराधिक केस चल रहे हैं. उनका मानना है कि इस तरह के कंटेंट से एक अपराधी को समाज के सामने नायक की तरह पेश किया जा रहा है, जो कानून की नजर में बिल्कुल गलत है. नोटिस में उन्होंने साफ कहा है कि किसी अपराधी के जीवन को नाटकीय रूप देना न केवल अपराध को बढ़ावा देना है, बल्कि इससे युवाओं पर भी बहुत बुरा असर पड़ सकता है.

सांसद वारिंग ने पंजाब के मौजूदा हालात का हवाला देते हुए चिंता जताई है कि राज्य पहले ही गैंगस्टरों और युवाओं के भटकाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है. ऐसे संवेदनशील माहौल में अगर किसी गैंगस्टर को हीरो बनाकर दिखाया जाएगा, तो लोग उसे फॉलो करने लगेंगे और अपराध की दुनिया के प्रति उनका आकर्षण बढ़ जाएगा. वारिंग के मुताबिक, इससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और गैंग्स के बीच आपसी रंजिश भी बढ़ सकती है. उन्होंने कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि जहां अभिव्यक्ति की आजादी से समाज में अशांति फैलने का खतरा हो, वहाँ ऐसी सीरीज को रोकना ही सही कदम है, ताकि आने वाली पीढ़ी को अपराध की तरफ जाने से बचाया जा सके.

बढ़ सकती हैं ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और मेकर्स की मुश्किलें
सांसद अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने अपने कानूनी नोटिस में भारत के संविधान और आईटी नियमों का जिक्र करते हुए बताया कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह कतई नहीं है कि आप कुछ भी परोस दें. उन्होंने अनुच्छेद 19(2) का उदाहरण देते हुए कहा कि मौलिक अधिकारों पर भी कुछ पाबंदियां होती हैं, खासकर तब जब मामला पब्लिक सिक्योरिटी से जुड़ा हो. उनका कहना है कि ऐसा कॉन्टेंट जो समाज में अस्थिरता पैदा करे या क्रिमिनल गतिविधियों को जायज ठहराने की कोशिश करे, उस पर बैन लगाना जरूरी है. राजा वारिंग का यह कदम अपराधियों के महिमामंडन के खिलाफ एक कड़ी चेतावनी है, जिससे अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और मेकर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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Abhishek Nagar

अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें



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