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Nitish Kumar Politics: बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है. सीएम की कुर्सी छोड़ने और सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने के पीछे उनकी गहरी रणनीति छिपी है. यह कोई सत्ता का त्याग नहीं बल्कि अपनी पकड़ और मजबूत करने का मास्टरप्लान है. नीतीश ने गैर-यादव ओबीसी, ईबीसी और सवर्णों के बीच ऐसा बैलेंस बनाया है, जिससे विपक्ष पूरी तरह किनारे हो गया है.
नीतीश कुमार ने सीएम की कुर्सी बीजेपी के लिए छोड़ दी है. बीजेपी ने सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है. (PTI Photo)
पटना: बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की ताजा चाल को उनके वर्चस्व को और बढ़ाने वाले एक मास्टरस्ट्रोक के तौर पर देखा जा सकता है. बीजेपी ने सम्राट चौधरी के जरिए पहली बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री पाकर एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है. इसके बावजूद नीतीश कुमार की ताकत कम होने के बजाय और ज्यादा केंद्रित होती दिख रही है. एनडीए के सेटअप में जेडीयू की प्रासंगिकता खत्म होने की चर्चाएं बहुत तेज थीं. मगर नीतीश कुमार ने अपनी नई रणनीति से यह साबित कर दिया है कि वह अभी भी बिहार की राजनीति के केंद्र में हैं. उन्होंने सत्ता की हिस्सेदारी का एक ऐसा स्क्रिप्ट तैयार किया है, जिसने गैर-यादव ओबीसी, ईबीसी और सवर्णों के गठबंधन पर उनकी पकड़ को और मजबूत कर दिया है.
सम्राट चौधरी को सीएम बनाने के लिए बीजेपी को मनाना और दिल्ली तक अपनी बात मनवाना उनकी बड़ी जीत है. यह पीछे हटना नहीं बल्कि प्रभुत्व की एक नई ब्रांडिंग है. नीतीश अब सरकार के दृश्य चेहरे के बजाय उस अदृश्य वास्तुकार की भूमिका में आ गए हैं, जो सरकार की दिशा और जातीय गणित तय करेगा.

