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MBBS vs BSc Nursing Difference: मेडिकल फील्ड में करियर बनाना है लेकिन कन्फ्यूज हैं कि एमबीबीएस करें या बीएससी नर्सिंग? जानिए दोनों मेडिकल कोर्सेस की अवधि, एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षाएं, फीस का ढांचा, करियर स्कोप और सैलरी का पूरा लेखा-जोखा.
MBBS vs BSc Nursing: एमबीबीएस और बीएससी नर्सिंग कोर्स में कई बेसिक अंतर हैं
नई दिल्ली (MBBS vs BSc Nursing Difference). 12वीं में बायोलॉजी (PCB) विषय लेने वाले हर स्टूडेंट का सबसे बड़ा सपना होता है मेडिकल फील्ड में करियर बनाना. जब भी इस सेक्टर की बात आती है तो दिमाग में दो ही सबसे बड़े नाम घूमते हैं- एमबीबीएस और बीएससी नर्सिंग. हालांकि, इन दोनों ही मेडिकल कोर्सेस का समाज में अपना अलग रुतबा और महत्व है, लेकिन अक्सर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स इनके बीच के बुनियादी अंतर को लेकर कन्फ्यूजन में रहते हैं.
एमबीबीएस और बीएससी नर्सिंग में क्या अंतर है?
- MBBS (Bachelor of Medicine and Bachelor of Surgery): यह कोर मेडिकल डिग्री है. इसके तहत छात्र बीमारियों की पहचान (Diagnosis), उनका इलाज, सर्जरी और दवाइयां प्रिस्क्राइब करना सीखते हैं. एमबीबीएस डॉक्टर हॉस्पिटल का मुख्य मेडिकल डिसीजन मेकर होता है.
- BSc Nursing (Bachelor of Science in Nursing): यह 4 साल का प्रोफेशनल कोर्स है जो पूरी तरह से ‘पेशेंट केयर’ (मरीजों की देखभाल) पर केंद्रित है. नर्सिंग ऑफिसर डॉक्टर की मदद करते हैं, मरीजों को क्रिटिकल केयर देते हैं, दवाइयों का चार्ट संभालते हैं और मेडिकल टेक्नोलॉजी ऑपरेट करते हैं.
MBBS vs BSc Nursing: दोनों कोर्स की ड्यूरेशन क्या है?
- एमबीबीएस: यह कोर्स कुल 5.5 साल का होता है. इसमें 4.5 साल की थियरी और प्रैक्टिकल पढ़ाई होती है और इसके बाद 1 साल की अनिवार्य रोटेटरी इंटर्नशिप करनी होती है.
- बीएससी नर्सिंग: यह कोर्स कुल 4 साल का होता है. इसमें 3.5 साल की क्लासरूम और क्लीनिकल ट्रेनिंग होती है और आखिरी के 6 महीने में अनिवार्य रूप से इंटर्नशिप करनी पड़ती है.
MBBS vs BSc Nursing: एडमिशन कैसे मिलता है?
- एमबीबीएस के लिए: पूरे देश में सिर्फ और सिर्फ एक ही परीक्षा है- NEET-UG (National Eligibility cum Entrance Test). इसमें बहुत ही हाई रैंक और स्कोर लाने वाले स्टूडेंट्स को ही सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट मिलती है.
- बीएससी नर्सिंग के लिए: इसके लिए कई रास्ते हैं. AIIMS, PGIMER या JIPMER जैसे देश के टॉप संस्थानों में एडमिशन के लिए उनके खुद के नेशनल एंट्रेंस टेस्ट होते हैं. कई राज्यों में अब नीट के स्कोर के आधार पर भी बीएससी नर्सिंग में दाखिला मिलने लगा है, जबकि कुछ राज्य अलग प्रवेश परीक्षा भी आयोजित करते हैं.
MBBS vs BSc Nursing: फीस का गणित
| कोर्स | सरकारी कॉलेज की फीस | प्राइवेट कॉलेज की फीस |
| एमबीबीएस | 50 हजार से 2 लाख रुपये (सालाना) | 10 लाख से 25 लाख रुपये (सालाना) |
| बीएससी नर्सिंग | 5 हजार से 30 हजार रुपये (सालाना) | 50 हजार से 1.5 लाख रुपये (सालाना) |
नोट: प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने का कुल खर्च 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक जा सकता है, जबकि नर्सिंग बेहद कम बजट में पूरी हो जाती है.
MBBS vs BSc Nursing: किसमें कितनी सैलरी मिलेगी?
- एमबीबीएस में स्कोप और सैलरी: एमबीबीएस करने के बाद सीधे सरकारी या प्राइवेट हॉस्पिटल में ‘जूनियर रेजिडेंट’ या मेडिकल ऑफिसर बन सकते हैं. शुरुआत में ही यहां 60,000 से 1,00,000 रुपये प्रति माह की सैलरी आसानी से मिल जाती है. हालांकि, करियर में बड़ी छलांग के लिए MD या MS (पोस्ट ग्रेजुएशन) करना जरूरी माना जाता है.
- बीएससी नर्सिंग में स्कोप और सैलरी: नर्सिंग करने के बाद स्टूडेंट्स को AIIMS जैसे सरकारी हॉस्पिटल में ‘नर्सिंग ऑफिसर’ बनने का मौका मिलता है, जहां शुरुआती सैलरी ही 70,000 से 80,000 रुपये प्रति माह (7th Pay Commission के तहत) होती है. प्राइवेट सेक्टर में शुरुआत 20,000 से 35,000 रुपये से होती है. सबसे बड़ा फायदा है कि भारतीय नर्सिंग डिग्री धारकों की विदेशों (जैसे UK, कनाडा, खाड़ी देशों) में भारी डिमांड है, जहां वे लाखों रुपये महीना कमाते हैं.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

