देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मंगलवार को बढ़ोतरी हुई है। सीकर में भी अब पेट्रोल 94 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। अब पेट्रोल की रेट 109.84 रुपए प्रति लीटर हो चुकी है। इतना ही नहीं डीजल पर भी करीब 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। नई दरे
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7 दिनों के भीतर दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले 15 मई को ही सीकर में पेट्रोल और डीजल में करीब 3-3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। सीकर पेट्रोलियम डीलर्स संगठन के महासचिव अरुण फागलवा ने बताता कि आज से नई दरें सीकर में लागू भी हो चुकी हैं।
देखिए पेट्रोल और डीजल के नए भाव
| ईंधन | पुरानी रेट(रुपए प्रति लीटर) | नई रेट(रुपए प्रति लीटर) | बढ़ोतरी(रुपए प्रति लीटर) |
| PETROL | 108.90 | 109.84 | 0.94 |
| DIESEL | 94.07 | 94.98 | 0.91 |
| POWER | 119.15 | 120.09 | 0.94 |
| TURBO | 97.62 | 98.53 | 0.85 |
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?
इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं।
क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं।
पड़ोसी देशों में बढ़े दाम, भारत में अब हुआ इजाफा
सरकार अब तक यह तर्क देती रही थी कि पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल आया है। इसके चलते पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें 15% से 20% तक बढ़ गईं, लेकिन भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका बोझ नहीं डाला गया।
2024 से दाम नहीं बदले थे, चुनाव से पहले कटौती हुई थी
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मार्च 2024 से स्थिर बनी हुई थीं। लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले सरकार ने कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती कर जनता को राहत दी थी। हालांकि, तकनीकी रूप से भारत में ईंधन की कीमतें विनियमित हैं और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क्रूड की 15 दिनों की औसत कीमत के आधार पर हर दिन रेट बदल सकती हैं, लेकिन राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण इन्हें लंबे समय तक नहीं बदला गया।
तेल कंपनियों को हर महीने 30 हजार करोड़ का घाटा हो रहा था
सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं ।
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
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