Agency:एजेंसियां
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ईरान जंग के दौरान दुनिया की आठ सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने सिर्फ तीन महीनों में 93 अरब डॉलर का मुनाफा कमाया. यह कमाई रोजाना के हिसाब से देखें तो 8,800 करोड़ बैठती है. लेकिन सवाल है कि कैसे?
मिडिल ईस्ट में बढ़ते टेंशन की वजह से आठ कंपनियों जमकर काटा मुनाफा
अमेरिका-ईरान जंग ने कई परिवार उजाड़ दिए, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों के खजाने भर गए. द गार्जियन के जुटाए आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया की आठ सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने अप्रैल से जून के बीच महज तीन महीनों में करीब 8.18 लाख करोड़ का मुनाफा कमाया. यानी इन कंपनियों ने हर दिन करीब 8,800 करोड़ रुपये की कमाई की. तभी तो ट्रंप को भी कहना पड़ा, ‘बहुत ज्यादा कमा रहे हैं.’
रिपोर्ट के मुताबिक, मुनाफे में यह उछाल अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान एनर्जी मार्केट में आई उथल-पुथल के कारण आया. जैसे-जैसे तनाव बढ़ा और अमेरिका के ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी, बाजार में आशंका बढ़ गई कि ईरान होर्मुज से तेल सप्लाई रोक सकता है. इसके बाद इन कंपनियों की चांदी हो गई. इसी आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया. संघर्ष के चरम पर ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. हालांकि जून के अंत तक आपूर्ति को लेकर चिंताएं कम होने पर कीमतों में गिरावट आई. अमेरिकी सरकार के अनुसार, अप्रैल 2026 में ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य 117.29 डॉलर, मई में 107.14 डॉलर और जून में 85.40 डॉलर प्रति बैरल रहा.
किस कंपनी को कितना मुनाफा
- सबसे ज्यादा फायदा सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको को हुआ. कंपनी का तिमाही शुद्ध मुनाफा 33 अरब डॉलर यानी करीब 2.90 लाख करोड़ रुपये रहा.
- एक्सॉनमोबिल ने करीब 1.28 लाख करोड़ रुपये मुनाफा कमाया, जो पिछले साल की समान अवधि से दोगुना और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद का उसका सबसे बड़ा तिमाही मुनाफा है.
- शेवरॉन ने अप्रैल-जून तिमाही में करीब 1.07 लाख करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया. वहीं शेल ने 9.84 अरब डॉलर यानी करीब 86,600 करोड़, टोटल एनर्जीज ने करीब ₹53,100 करोड़ और बीपी ने करीब ₹50,400 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया.
- अन्य कंपनियों में इक्विनोर ने करीब ₹28,200 करोड़) और एनी (Eni) ने करीब ₹19,000 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया. इन सभी कंपनियों की कमाई में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण ऊंची तेल कीमतें रहीं.
इन्वेस्टमेंट के लिए चाहिए मुनाफा
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) के अध्यक्ष माइक समर्स ने ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में कहा कि तेल कंपनियां कीमतें तय नहीं करतीं, बल्कि बाजार के हिसाब से काम करती हैं. उन्होंने कहा कि उद्योग को भविष्य में निवेश के लिए मजबूत मुनाफे की जरूरत होती है. समर्स ने यह भी कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक प्रभावित रहने के कारण ईंधन की कीमतों पर दबाव बना. इंटरव्यू के दौरान माइक समर्स ने यह भी कहा कि ट्रंप की नीतियों ने ऐसा माहौल बनाया, जिससे तेल उद्योग को फायदा मिला. हालांकि रिकॉर्ड मुनाफों के बीच यह बहस भी तेज हो गई है कि वैश्विक संकट और युद्ध जैसी परिस्थितियों में ऊर्जा कंपनियों की असाधारण कमाई पर क्या अतिरिक्त निगरानी या नियंत्रण होना चाहिए.
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ज्ञानेंद्र कुमार मिश्रा हिंदी पत्रकारिता का एक जाना-पहचाना नाम हैं. उन्हें मीडिया में करीब 20 साल का एक्सपीरियंस है. वर्तमान में वह News18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं …
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