सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा आजादी के समय पूरा देश निरक्षर देश के रूप में जाना जाता था, हिमाचल की साक्षरता दर भी मात्र 7 प्रतिशत थी, लेकिन आजादी के 78 साल बाद हिमाचल पूर्ण साक्षर राज्य बना है. इसके लिए सीएम ने सभी को बधाई दी. सीएम ने कहा कि मेरी माता जी पांचवी कक्षा तक और पिता जी 7वीं कक्षा तक पढ़े हुए थे, लेकिन वो कढ़े हुए थे, उन्होंने हमें पढ़ाया. हमने भी मेहनत की और मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे. गौरतलब है कि सीएम सुक्खू खुद एलएलबी पास हैं औऱ उनकी पढ़ाई शिमला से हुई है.
सीएम ने आगे कहा कि आज का दिन हिमाचल प्रदेश के लिए ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण है, आज हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य घोषित किया गया है इस उपलब्धि को हासिल करने में योगदान निभाने वाले प्रिय छात्रों को शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी महान हस्तियों और प्रदेशवासियों का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं.
समारोह के दौरान हिमाचल प्रदेश के डायरेक्टर स्कूल एजुकेशन आशीष कोहली ने हिमाचल के पूर्ण साक्षर राज्य बनने के सफर की जानकारी दी. आशीष कोहलनी ने कहा कि भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की टेक्निकल ग्रुप ऑन पॉपुलेशन प्रोजेक्शंस की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में हिमाचल की अनुमानित जनसंख्या लगभग 75.27 लाख थी. केंद्र सरकार के न्यू इंडिया लिटरेसी कार्यक्रम के तहत हिमाचल में साल 2024 में कुल 95 हजार 307 निरक्षर व्यक्तियों की पहचान की गई. एफ़.एल.एन.ए.टी–I और एफ़.एल.एन.ए.टी के परिणामों के अनुसार 42 हजार 578 व्यक्ति नव–साक्षर बन चुके हैं, इन आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 52 हजार 729 निरक्षर व्यक्ति बचे हैं, जबकि कुल जनसंख्या 75.27 लाख है और हिमाचल की वर्तमान साक्षरता दर 99.30% है. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में तहत केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार जिस राज्य की साक्षरता दर 95 प्रतिशत होगी उसे पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया जाएगा, इन्ही मानकों पर खरा उतरते हुए हिमाचल पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है. आशीष कोहली ने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश में 8वीं कक्षा तक हर बच्चा स्कूल जा रहा है.
शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने कहा कि आज गौरव का दिन है, हिमाचल के लिए ऐतिहासिक दिन है. 5 मई 1988 को राजीव गांधी ने राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की शुरुआत की थी, उस समय केरल का अर्नाकुलम जिला सबसे पहले साक्षर जिला घोषित हुआ था, उसके कुछ समय बाद ही हिमाचल केरल के बाद दूसरा साक्षर राज्य बना था आज और हिमाचल सबसे साक्षर राज्य बना है. उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि को हासिल करने में करीब 3 दशकों का समय लगा, आज शिक्षा हिमाचल प्रदेश के लोगों की पहली प्राथमिकता बन गई है. उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से साक्षर होने के 4 बिंदु घोषित किए गए हैं, उनको हिमाचल ने पूरा किया है. कंवर ने कहा कि अब हिमाचल डिजिटल, फाइनेंशियल और लीगल लिटरेसी की और बढ़ेगा.
समारोह में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि आज का दिन हिमाचल के इतिहास में स्वर्णिम दिन के रूप में जाना जाएगा, इसमें सभी प्रदेशवासियों और पूर्व में रही सभी सरकारों का योगदान. शिक्षा मंत्री ने कहा कि 1947 में प्रदेश की साक्षरता दर मात्र 7 प्रतिशत थी और महिलाओं की साक्षरता दर केवल 2 फीसदी थी लेकिन निरंतर प्रयासों से हिमाचल देश में साक्षरता दर में नंबर 1 स्थान पर पहुंचा है. रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल देश में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित राज्यों में नंबर 1 पर पहुंचा है. उन्होंने कहा कि वर्तमान हिमाचल सरकार प्रदेश के कुल बजट में से 17 से 18 फीसदी बजट शिक्षा पर खर्च कर कर रही है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि जब हमारी सरकार बनी थी, उस वक्त सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे यह विभाग मिलेगा, शिक्षा से मेरा भावनात्मक रिश्ता है. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए, पूर्व सरकार के समय में पूरे देश में हिमाचल 21 वें स्थान पर था, हमारे सामने कई बड़ी चुनौतियां थी, जिन्हें सबके सहयोग से पार किया, नीतिगत बदलाव के अच्छे परिणाम सामने आए हैं. साथ ही कहा कि देश में शिक्षा के हर मानकों पर हिमाचल अच्छे स्थान पर है और अब प्रदेश में शिक्षा को और आगे लेकर जाने के प्रयास जारी रहेंगे. शिक्षकों को लेकर उन्होंने कहा कि प्रदेश शिक्षा में और आगे तभी बढ़ेगा जब सभी शिक्षक समर्पण के भाव से कार्य करेंगे.

