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Sanjay Kapoor Property Dispute: दिल्ली हाईकोर्ट में संजय कपूर की 30,000 करोड़ की संपत्ति पर करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा और कियान ने हिस्सेदारी मांगी है. उन्होंने प्रिया कपूर पर वसीयत में हेरफेर का आरोप लगाया …और पढ़ें
कानून के जानकारों का कहना है कि वसीयत को कोर्ट में चुनौती देना बेहद मुश्किल काम होता है. एडवोकेट शिस्बा चावला के मुताबिक करिश्मा कपूर चाहती हैं कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहे और उनकी सही देखभाल हो. लेकिन अगर एक बार वसीयत तैयार हो जाए, तो उसे गलत साबित करना आसान नहीं होता.
शिस्बा चावला ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा, ‘वसीयत अपने आप में मजबूत कानूनी दस्तावेज मानी जाती है. इसे चुनौती देने वाले को यह साबित करना पड़ता है कि दस्तखत नकली हैं, कागज़ धोखे से बनाया गया है या फिर गवाहों की भूमिका संदिग्ध है. बिना ठोस सबूतों के कोर्ट में वसीयत को फर्जी करार देना लगभग नामुमकिन है’. शिस्बा के मुताबिक करिश्मा कपूर के बच्चों का कहना है कि उनके पिता उनसे हर ज़रूरी बात शेयर करते थे. अगर उन्होंने वसीयत बनाई होती तो ज़रूर बताया होता. अब यह मामला पूरी तरह कोर्ट के हाथ में है. आने वाले समय में ही तय होगा कि इतनी बड़ी संपत्ति का असली हकदार कौन है.
संजय कपूर का जून 2025 में हुआ था निधन
संजय कपूर का निधन जून 2025 में हुआ था. उनकी मौत के समय वे अपनी तीसरी पत्नी प्रिया कपूर के साथ विवाहित थे, जिनसे उनका एक बेटा भी है. इससे पहले संजय की शादी करिश्मा कपूर से हुई थी, जिनसे उनके दो बच्चे समायरा और कियान हैं.
करिश्मा कपूर के बच्चों का आरोप है कि उनकी सौतेली मां प्रिया कपूर ने पिता की वसीयत (Will) में हेरफेर कर पूरी संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की है. उनका कहना है कि प्रिया ने अपने सहयोगियों दिनेश अग्रवाल और नितिन शर्मा के साथ मिलकर वसीयत को सात हफ्तों तक छुपाकर रखा और 30 जुलाई 2025 को परिवार की बैठक में इसे पेश किया.
फर्जी तरीके से तैयार की गई…
बच्चों का आरोप है कि यह वसीयत असली नहीं है, बल्कि फर्जी तरीके से तैयार की गई है. उन्होंने कहा कि न तो उन्हें वसीयत की असली कॉपी दिखाई गई और न ही उसकी कोई प्रति दी गई. शुरुआत में प्रिया ने दावा किया था कि कोई वसीयत है ही नहीं और संजय कपूर की सारी संपत्ति आर.के.फैमिली ट्रस्ट के अधीन है. लेकिन बाद में उन्होंने 21 मार्च 2025 की तारीख वाली वसीयत पेश की और इसे असली बताया. इसी बात से बच्चों को संदेह हुआ कि वसीयत में गड़बड़ी है.
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले… और पढ़ें

