हाई कोर्ट की नई वेबसाइट पर ई-हियरिंग के दौरान लगातार आ रही तकनीकी दिक्कतों को लेकर डिवीजन बेंच ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि पोर्टल का ई-हियरिंग को ठीक से सपोर्ट नहीं करना आईटी स्टाफ की कार्यप्रणाली और क्षमता पर सवाल खड़े करता है। न्यायिक कार्य में तकनीकी खामी के कारण समय बर्बाद होना स्वीकार नहीं किया जा सकता। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने चीफ जस्टिस से संबंधित आईटी स्टाफ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार करने की सिफारिश की है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (आईटी-सीएसए) केएस कुशवाहा को मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और 7 दिन में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। पूरे आईटी सिस्टम का स्वतंत्र ऑडिट, 30 दिन में रिपोर्ट कोर्ट ने हाई कोर्ट के आईटी सिस्टम और नई वेबसाइट का स्वतंत्र ऑडिट कराने के भी निर्देश दिए हैं। इसके लिए टीसीएस, इंफोसिस या एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसी तकनीकी कंपनियों के विशेषज्ञों की टीम बनाई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर सी-डॉट और नैस्कॉम के अधिकारियों को भी टीम में शामिल किया जा सकता है। ऑडिट पूरा कर इसकी रिपोर्ट 30 दिन में पेश करनी होगी। 15 दिन बाद भी वेबसाइट की दिक्कतें दूर नहीं हुईं
25/26 अगस्त को भेजा था संदेश: कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने जजों के ग्रुप में व्हाट्सएप संदेश भेजकर वेबसाइट अपडेट में करीब 8 दिन लगने की जानकारी दी थी।
15 दिन बाद भी स्थिति में सुधार नहीं: तय समय बीतने के बावजूद नई वेबसाइट की तकनीकी स्थिति संतोषजनक नहीं पाई गई।
वकीलों ने भी बताई परेशानी: सुनवाई के दौरान मौजूद अधिवक्ताओं ने नई वेबसाइट में आ रही दिक्कतों की शिकायत की और पुरानी वेबसाइट को बेहतर बताया।
जांच में बफरिंग और हैंग की समस्या: रजिस्ट्रार केएस कुशवाहा की मौजूदगी में सिस्टम की जांच की गई तो वेबसाइट पर बफरिंग और हैंग होने जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आईं।
8 सितंबर को पारित हुआ आदेश: कोर्ट ने यह आदेश आदित्य सोनी बनाम मध्य प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई के दौरान 8 सितंबर 2026 को पारित किया।
Source link
7 दिन में रिपोर्ट; 30 दिन में ऑडिट के निर्देश: ई-हियरिंग में तकनीकी खामी पर हाई कोर्ट नाराज; आईटी स्टाफ की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल – Jabalpur News
RELATED ARTICLES

