ढाका8 मिनट पहले
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पिछले साल 5 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने शेख हसीना का तख्तापलट कर दिया था।
बांग्लादेश सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पुराने आधिकारिक घर ‘गणभवन’ को म्यूजियम में बदलने का फैसला किया है। इसे ‘जुलाई क्रांति स्मारक संग्रहालय’ कहा जाएगा।
शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान ने इस घर को फिर से बनवाया था। इससे पहले इस जगह को एस्टेट राजबाड़ी के नाम से जाना जाता था।
गणभवन ढाका के शेर-ए-बांग्ला नगर में है, जो संसद भवन के पास है। बांग्लादेश सरकार इसे देश के नेता के आधिकारिक घर के रूप में इस्तेमाल करती थी।
शेख हसीना 2010 में यहां रहने आई थीं और 5 अगस्त 2024 तक यानी 15 साल यही उनका घर रहा। पिछले साल उनके तख्तापलट के कुछ देर बाद ही यहां तोड़फोड़ और लूटमार शुरू हो गई थी।

प्रदर्शनकारी शेख हसीना के घर पर चढ़ गए थे।
भीड़ ने हमला कर महिलाओं के कपड़े भी लूट लिए थे
भीड़ ने यहां से साड़ियां, सजावटी सामान, घड़ियां, सोफे, लग्जरी हैंडबैग, टेलीविजन, मछलियां और यहां तक कि महिलाओं के कपड़े तक लूट लिए थे। सोशल मीडिया पर लूट की तस्वीरें वायरल हो गईं थीं। बाद में अधिकारियों ने दावा किया कि लूटा गया सामान वापस कर दिया गया।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस की लीडरशिप वाली अंतरिम सरकार ने गणभवन को शेख हसीना के कुशासन की निशानी बताते हुए इसे म्यूजियम बनाने की घोषणा की। यह म्यूजियम पिछले साल की हिंसा में मारे गए प्रदर्शनकारियों की याद में बनाया जा रहा है।
बांग्लादेश के संस्कृति मंत्रालय ने इस म्यूजियम के मैनेजमेंट के लिए 200 पदों का प्रस्ताव दिया है।

गणभवन के बेडरूम में सोते हुए प्रदर्शनकारी।

आदमियों के साथ-साथ कई महिलाओं ने भी यहां का कीमती सामान चुरा लिया था।

गणभवन के तालाब में पाली हुई मछलियों के पकड़ते हुए प्रदर्शनकारी।

कई प्रदर्शनकारियों यहां पाले गए जानवर चोरी करके अपने घर ले गए थे।

गणभवन से महिलाओं के चुराए गए कपड़ों को हवा में लहराता एक प्रदर्शनकारी।
शेख मुजीब से जुड़ी कई निशानियों पर हमला
बांग्लादेश में बीते एक साल से लगातार शेख हसीना और उनके पिता से जुड़ी कई निशानियों पर हमला किया जा रहा है। बीते 12 महीने में शेख मुजीब की मूर्ति को तोड़ा गया और कई सार्वजनिक स्थानों पर लगी नेमप्लेट को भी हटा दिया गया।
इसके अलावा स्कूल की किताबों में उनसे जुड़े कई चैप्टर को बदला गया और नोट पर लगी तस्वीरों को भी हटा दिया गया।
अंतरिम सरकार ने आजादी और संस्थापक से जुड़े दिनों की 8 सरकारी छुट्टियां भी कैंसिल कर दी थी। शेख मुजीबुर्रहमान बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति थे। वह 17 अप्रैल 1971 से लेकर 15 अगस्त 1975 तक देश के प्रधानमंत्री भी रहे थे।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता मुजीबुर्रहमान ने बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजादी दिलाने में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। 15 अगस्त 1975 को शेख मुजीबुर्रहमान की उनके घर पर ही हत्या कर दी गई थी।
शेख हसीना एक साल से भारत में रह रहीं
शेख हसीना पिछले साल 5 अगस्त को देश छोड़कर भारत आ गई थीं। दरअसल, उनके खिलाफ देशभर में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे।
बांग्लादेश में 5 जून को हाईकोर्ट ने जॉब में 30% कोटा सिस्टम लागू किया था, इस आरक्षण के खिलाफ ढाका में यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे थे।
यह आरक्षण स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को दिया जा रहा था। हालांकि हसीना सरकार ने यह आरक्षण बाद में खत्म कर दिया था।
इसके बाद छात्र उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। बड़ी संख्या में छात्र और आम लोग हसीना और उनकी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए।
इस प्रोटेस्ट के दो महीने बाद 5 अगस्त को उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अंतरिम सरकार की स्थापना की गई।

हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना ने देश छोड़ दिया था और हेलिकॉप्टर में बैठकर भारत आ गई थीं।

