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High Court Order on Passport: पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महिला के पासपोर्ट को लेकर आदेश दिया है. यह महिला पासपोर्ट रद्द करने के फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुंची थी क्योंकि उसने गलती से तलाकशुदा पति का नाम पासपोर्ट पर लिखवा दिया था. जानें कोर्ट ने दिया क्या आदेश….
यह निर्णय न्यायमूर्ति हर्ष बंजर की एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा दिया गया, जिसमें नवप्रीत कौर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की गई थी, जिन्होंने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा उनके पासपोर्ट को रद्द करने और मुख्य पासपोर्ट अधिकारी द्वारा उनकी अपील को खारिज करने को चुनौती दी थी.
क्या है मामला?
क्या था कोर्ट के सामने सवाल?
कोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी सवाल था कि क्या याचिकाकर्ता के पिछले पति का नाम पासपोर्ट आवेदन में ‘पति का नाम’ कॉलम में उल्लेख करना महत्वपूर्ण जानकारी को छुपाना या गलत जानकारी देना माना जा सकता है ताकि 1967 अधिनियम की धारा 10(3)(b) को आकर्षित किया जा सके…? न्यायमूर्ति हर्ष बंजर ने पासपोर्ट अधिनियम के प्रावधानों की जांच की. कोर्ट ने देखा कि धारा 10(3)(b) के तहत शक्ति ‘विवेकाधीन’ है. कोर्ट ने तर्क दिया कि जानकारी को ‘महत्वपूर्ण’ माना जाने के लिए उसकी छुपाई गई जानकारी ‘पासपोर्ट प्राप्त करने के उद्देश्य से’ होनी चाहिए और ऐसी होनी चाहिए कि पासपोर्ट प्राधिकरण को अधिनियम की धारा 6 के तहत पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने के लिए प्रेरित करे.
कोर्ट ने फैसले में क्या कहा…
कोर्ट ने पाया कि अधिनियम की धारा 6(2) जो पासपोर्ट को अस्वीकार करने के आधारों को रेखांकित करती है कि आवेदक की वैवाहिक स्थिति के संबंध में जानकारी को छुपाना या गलत जानकारी देना शामिल नहीं है. निर्णय में कहा गया कि स्पष्ट रूप से, 1967 अधिनियम की धारा 6 की उप-धारा (2) में आवेदक की वैवाहिक स्थिति के संबंध में जानकारी को छुपाने या गलत जानकारी देने का उल्लेख नहीं है. कोर्ट ने पासपोर्ट नियम, 1980 का भी संदर्भ दिया, जो ऐसी गलतियों पर एक सूक्ष्म दृष्टिकोण प्रदान करता है. नियमों की अनुसूची III वैवाहिक स्थिति/पति का नाम आदि के संबंध में जानकारी को अनजाने में छुपाने को एक मामूली अपराध के रूप में वर्गीकृत करती है, जिसके लिए 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. कोर्ट ने देखा कि यह प्रावधान इंगित करता है कि ऐसी गलती को पासपोर्ट रद्द करने के योग्य गंभीर अपराध नहीं माना जाता.

