Thursday, April 16, 2026
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जुबीन गर्ग के निधन के 7 दिन बाद मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा ने सुनाई आपबीती, आरोपों पर दी सफाई- ‘पाई-पाई का हिसाब…’


नई दिल्ली: जुबीन गर्ग के निधन से संगीत जगत में एक खालीपन आ गया है, जिसे भरना मुश्किल है. सिंगापुर में इवेंट में हिस्सा लेने पहुंचे जुबीन गर्ग की स्कूबा डाइविंग के बाद मौत हो गई थी. दिग्गज सिंगर के निधन की वजह डूबना बताया गया है. जुबीन की मौत के बाद उनके मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा पर कई तरह के आरोप लगाए गए. उन्होंने पहली बार अपनी बात रखी है. सिद्धार्थ शर्मा ने फेसबुक पर पोस्ट करके खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश की.

सिद्धार्थ शर्मा ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ‘असम हमेशा से मेरा घर रहा है और हमेशा रहेगा. जिन लोगों ने मुझे प्यार, सम्मान और रोजी-रोटी दी, वे आज तकलीफ में हैं और मैं उनके दर्द में शामिल हूं. चुप्पी का गलत मतलब निकाला जा सकता है. कुछ लोग सोचते हैं कि अगर मैं कुछ नहीं कहूंगा या तुरंत वापस नहीं आऊंगा, तो इसका मतलब है कि मैं कुछ गलत कर रहा हूं. इसीलिए मैं यह पत्र लिख रहा हूं. मैं सबको बताना चाहता हूं कि मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है. मैं भागा नहीं हूं. जैसे ही मुझे अपनी सिक्योरिटी का आश्वासन और सच सामने लाने का उचित अवसर मिलेगा, मैं गुवाहाटी आऊंगा और एसआईटी और जनता के सामने अपना पक्ष रखूंगा.

आरोपों पर खुलकर बोले सिद्धार्थ शर्मा
सिद्धार्थ शर्मा ने आपबीती सुनाते हुए कहा, ’19 सितंबर 2025 को जब हम सिंगापुर में ‘नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल’ के लिए गए थे, हमारे बड़े भाई जुबीन दा तैराकी करते समय एक दुखद दुर्घटना का शिकार बन गए. मैं घटना से पहले और बाद में उनके साथ था, उनकी मदद करने की पूरी कोशिश की और फिर उन्हें भारत वापस लाने की तैयारी की. कई मीडिया संस्थानों ने जल्द ही मुझे दोषी ठहराना शुरू कर दिया और मुझे जान से मारने की धमकियां, नफरत भरे मैसेज और गालियां मिलने लगीं. दोस्तों और परिवार ने मुझे गुवाहाटी आने से रोक दिया और मुझे दिल्ली में ही रहने के लिए मजबूर होना पड़ा.

सिद्धार्थ शर्मा ने बयां किया दुख
न्यूज18 बंगाली की रिपोर्ट के अनुसार, सिद्धार्थ शर्मा ने दुख जताते हुए कहा, ‘उन्हें खोने से मेरे दिल में एक ऐसा खालीपन आ गया है जो कभी नहीं भरेगा. लेकिन जो बात मुझे और भी ज्यादा तोड़ देती है, वह यह है कि मैं उनके साथ नहीं आ पा रहा हूं, उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पा रहा हूं और उनके परिवार के साथ खड़ा नहीं हो पा रहा हूं. मैं असहाय और सदमे में हूं, क्योंकि मेरी पूरी दुनिया ही बदल गई है. ऑनलाइन और टेलीविजन पर फैली अफवाहों, गालियों और धमकियों से मैं हैरान और दुखी हूं. कुछ लोगों ने मुझ पर उस दिन लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है. कुछ ने दावा किया है कि मैंने जुबिन के नाम और पैसे का इस्तेमाल पैसे छिपाने या बिजनेस बनाने के लिए किया है . कुछ ने तो यहां तक कहा है कि मुझे कॉपीराइट रॉयल्टी मिल गई है और अब मैं इसका एकमात्र मालिक हूं . ये आरोप पूरी तरह से झूठे हैं . मैंने कभी भी उनकी अमानत या उनके पैसों का दुरुपयोग नहीं किया है और मैं अधिकारियों और उनके परिवार के सामने पाई-पाई का हिसाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हूं .’

क्या जुबीन गर्ग को मिलती थी 38000 गानों की रॉयल्टी
सिद्धार्थ ने बताया कि कॉपीराइट और रॉयल्टी के बारे में सच्चाई यह है कि उनके द्वारा रिकॉर्ड किए गए 38000 गानों में से ज्यादातर पूरी तरह से दूसरे म्यूजिक लेबल और प्रोडक्शन हाउस के अधीन हैं . उन्होंने खुद कभी उनसे एकमुश्त गायक के महताने के रूप में कुछ हजार रुपयों के अलावा कोई पैसा नहीं लिया . इनमें से ज्यादातर गाने , जिनमें उनके लगभग सभी हिट गाने भी शामिल हैं, मेरे उनके जीवन में आने से पहले रिकॉर्ड किए गए थे. जुबीन अक्सर मुझे बताते थे कि लोग उनके साथ कैसा व्यवहार करते थे- कैसे उनके गानों से अरबों रुपये की कमाई के बावजूद उन्हें असम के निर्माताओं या म्यूजिक लेबल से कोई रॉयल्टी नहीं मिली . कोई भी उन निर्माताओं और लेबल से सीधे संपर्क करके इसकी पुष्टि कर सकता है .

सच सामना लाना चाहते हैं सिद्धार्थ शर्मा
सिद्धार्थ शर्मा ने आगे बताया, ‘2021 में वह अपनी कुछ क्रिएशन का स्वामित्व बरकरार रखना चाहते थे और इसलिए ‘जुबिन गर्ग म्यूजिक एलएलपी’ का गठन किया. यह पहला और एकमात्र बिजनेस था जिसमें हम दोनों हिस्सेदार थे. हमने इस संस्थान के तहत 20 से अधिक गाने रिलीज किए हैं, जिसमें कुल निवेश लगभग 10 लाख रुपये है, जिसमें से उन्होंने होने वाली कमाई कुछ हजार रुपये प्रति माह ही है. हर पैसा कंपनी के खाते में जाता है और आज तक किसी ने एक पैसा नहीं निकाला है. जुबीन दा के पास एलएलपी का 60% स्वामित्व था जो अब उनकी पत्नी के नाम पर ट्रांसफर हो जाएगा और मुझे अपना हिस्सा भी परिवार को ट्रांसफर करने पर गर्व होगा. सभी बातों की पुष्टि आसानी से की जा सकती है और मैं हर सबूत पेश करने के लिए तैयार हूं. यह बहुत दुखद है कि जिन लोगों ने सालों तक जुबीन दा का अपने निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया, वे अब अपनी गलतियों को छिपाने और खुद को बचाने के लिए मेरे खिलाफ झूठ फैला रहे हैं. असम सरकार ने इस मामले की जांच के लिए पहले ही एक विशेष जांच दल ( SIT) का गठन कर दिया है और मैं इसका सम्मान करता हूं. बाकी सभी की तरह मैं भी चाहता हूं कि सच्चाई सामने आए. मैं जांच में पूरा सहयोग करूंगा और अधिकारियों को जरूरी हर जानकारी दूंगा.



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