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Special Sweet Khaja Recipe: झारखंड के पलामू में शादी के मौसम में मौसी और बुआ के घर से खास मिठाई खाजा लाने की परंपरा है. यह रस्म रिश्तों के प्रेम और अपनापन का प्रतीक मानी जाती है. आइये जानते हैं इस मिठाई की परंपरा और इसकी रेसिपी के बारे में.
पलामू : भारतीय परंपरा में हर क्षेत्र की अपनी अलग पहचान और सांस्कृतिक विरासत होती है. जो खास तौर पर शादी-विवाह जैसे शुभ अवसरों पर साफ झलकती है. वहीं, विवाह सिर्फ एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि रिश्तों, रीति-रिवाजों और भावनाओं का संगम होता है. शादी का सीजन शुरू होते ही घरों में तैयारियां तेज हो जाती हैं और बाजारों में रौनक बढ़ जाती है. इस दौरान मिठाइयों की मांग भी काफी बढ़ जाती है. क्योंकि यहां हर रस्म में मिठाई का विशेष महत्व होता है.
झारखंड में एक खास परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें मौसी और बुआ के घर से मिठाई लाने की रस्म निभाई जाती है. इसे प्रेम, सम्मान और अपनापन का प्रतीक माना जाता है. खासकर बुआ अपने ससुराल से अपने मायके के लिए पारंपरिक मिठाइयां तैयार कर लाती हैं. इनमें खाजा और अरीसा जैसी मिठाइयां प्रमुख होती हैं. यह सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि रिश्तों की मिठास को दर्शाने के लिए भी जानी जाती हैं. बहन-बेटियों की यह भूमिका शादी के माहौल को और भी खास बना देती है. जहां उनके हाथों की बनी मिठाई में अपनापन झलकता है.
शादी में इस मिठाई की है अनोखी परंपरा
पलामू जिले के मेदिनीनगर की रहने वाली गृहणी चंपा देवी ने लोकल 18 को बताया कि हमारे यहां शादी विवाह में मौसी और बुआ अपने मायके मिठाई बनाकर ले जाती हैं. खाजा एक पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई है, जिसके बनाने की प्रक्रिया लंबी और मेहनत भरी होती है. इसे तैयार करने के लिए सबसे पहले मैदा को हल्के गर्म पानी से अच्छी तरह गूंथ लिया जाता है. इसके बाद मैदा और सरसों तेल का एक अलग मिश्रण तैयार किया जाता है. गूंथे हुए मैदे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उनमें इस मिश्रण का लेप लगाया जाता है और फिर उन्हें रोल कर लिया जाता है. इस रोल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर हर टुकड़े को बेलकर चपटा किया जाता है.
जानें खाजा की रेसिपी
उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद इन टुकड़ों को गरम तेल में तला जाता है. तलते समय खास ध्यान रखा जाता है कि खाजा के अंदर की परतें अच्छी तरह फूलें. इसके लिए हल्के से कांटे से छेद भी किया जाता है. जब खाजा सुनहरा और कुरकुरा हो जाता है, तब उसे बाहर निकाल लिया जाता है. इसके बाद चीनी का पाग तैयार किया जाता है, जिसके लिए लगभग सवा किलो चीनी में दो गिलास पानी मिलाकर पकाया जाता है. जब तक कि उसमें तार बनने लगे. तैयार खाजा को इस मीठे रस में डुबोकर कुछ समय के लिए रखा जाता है, जिससे उसमें मिठास अच्छी तरह समा जाए.
उन्होंने कहा कि इस तरह तैयार खाजा न केवल स्वाद में लाजवाब होता है. बल्कि यह परंपरा, प्रेम और रिश्तों की मिठास का प्रतीक भी बन जाता है. जो शादी-विवाह के इस मौसम में हर घर की रौनक बढ़ा देता है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

