Friday, April 24, 2026
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8 बीघा में फूलों की खेती, 10 लाख सालाना कमाई: कर्ज से जमीन बेचने की नौबत आ गई थी, एक सलाह ने बदली किस्मत – Tinwari News




पिता को कैंसर होने के बाद पांच साल तक इलाज में लाखों रुपए का कर्ज हो गया। मंडी की नौकरी से मिलने वाली सैलरी बहुत कम थी। जमीन बेचने की नौबत आ गई थी। इस मुश्किल समय में मंडी व्यापारी ने न सिर्फ हौसला बढ़ाया, बल्कि आर्थिक मदद भी की। पिता के निधन के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया। व्यापारी की सलाह पर फूलों की खेती शुरू की। गेंदा, गुलाब व बिजली फूल की खेती ने जिंदगी को नया रास्ता दिया। आज उसी मेहनत के दम पर 8 बीघा में खेती से सालाना करीब 10 लाख रुपए की कमाई हो रही है। म्हारे देश की खेती आज बात जोधपुर के किसान रमेश परिहार (38) की… रमेश परिहार 8 बीघा जमीन में फूलों की खेती कर रहे हैं, जिसमें चार बीघा में कलकत्ती गेंदा, ढाई बीघा में देसी गुलाब और डेढ़ बीघा में सफेद बिजली फूल की खेती शामिल है। 8वीं के बाद छोड़ी पढ़ाई, खेती से संभाला परिवार परिहार बताते हैं कि परिवार की मदद के लिए उन्होंने 8वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर खेती संभाल ली। पिता के साथ खेती करना जरूरी था, क्योंकि अकेले उनसे काम नहीं हो पाता था। दोनों भाइयों ने भी पढ़ाई छोड़ दी और सब्जी/अनाज मंडी में गाड़ी से माल लाने-ले जाने का काम करने लगे। पिछले 25 साल से खेती कर रहे हैं, लेकिन साल 2014 में पिता की बीमारी के दौरान 30 लाख रुपए खर्च होने से कर्जा करना पड़ा। 2018 में का बीमार से निधन हो गया। परिवार संभालने के साथ कर्ज चुकाने की दोहरी जिम्मेदारी आ गई। मंडी में मिलने वाली सैलरी काफी कम थी। इस दौरान मंडी व्यापारी की सलाह और मदद पूरा सिस्टम ही बदल गया। आज फूलों की खेती से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कलकत्ती गेंदा: कम लागत में ज्यादा उत्पादन गेंदे की खेती के बारे में वे बताते हैं कि चार बीघा में कलकत्ती गेंदा उगा रहे हैं। पौधे वे पुष्कर (अजमेर) से एक रुपए प्रति पौधा के हिसाब से लेकर आए थे। इस फूल का रंग केसरिया होता है और इसमें खुशबू नहीं होती। पौधे की उम्र करीब 120 दिन होती है। इसमें हाईब्रिड और ग्राफ्टिंग पौधा ज्यादा उपयुक्त रहता है, क्योंकि बीज महंगा पड़ता है और फूल की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं आती। एक हजार बीज करीब 3500 रुपए के पड़ते हैं, जबकि नर्सरी से तैयार पौधे लाकर सीधे खेत में लगाए जाते हैं, जिससे जल्दी उत्पादन शुरू हो जाता है। एक पौधे से साल में करीब 10 महीने उत्पादन लिया जाता है, जबकि मई-जून में पौधे नहीं लगाए जाते। महीने में तीन बार तुड़ाई होती है और एक बीघा में करीब 4 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है। खेती की तैयारी और सिंचाई का तरीका खेती की तैयारी में वे बताते हैं कि जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए पौधे लगाने से पहले प्रति बीघा एक ट्रॉली गोबर खाद डाली जाती है। इसके बाद जमीन को समतल कर पौधे लगाए जाते हैं। गर्मियों में क्यारी बनाकर पौधे लगाए जाते हैं और सात दिन में एक बार पानी दिया जाता है, जबकि सर्दियों में बेड बनाकर ड्रिप सिंचाई की जाती है और 15 दिन में एक बार पानी देना पड़ता है। कीट नियंत्रण और मंडी में अच्छा भाव फसल की सुरक्षा के लिए जड़ों में फंगस और कीटों से बचाव के लिए स्प्रे किया जाता है। इससे मधुमक्खी और अन्य कीट नहीं लगते और जड़ों में फंगस भी नहीं होता। तैयार फूलों का जोधपुर मंडी में करीब 35 रुपए प्रति किलो तक भाव मिल जाता है। सूखे हुए फूल के मिलते हैं ज्यादा दाम किसान ने बताया कि जब ताजे फूलों के अच्छे भाव नहीं मिलते, तो वे फूलों को सुखा लेते हैं। कई बार 15 रुपए प्रति किलो के भाव में लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सूखे फूलों को पीसकर अगरबत्ती बनाई जाती है। करीब तीन किलो गीले फूलों से एक किलो सूखे फूल तैयार होते हैं, जिसका बाजार में करीब 100 रुपए प्रति किलो तक भाव मिल जाता है। देसी गुलाब की खेती- 8 साल पहले लगाए 2000 पौधे किसान ने बताया कि 8 साल पहले देसी गुलाब के 2000 पौधे लगाए थे। पौधे की उम्र करीब 20 साल होती है। इनमें रोजाना नए फूल आते हैं और रोज तुड़ाई की जाती है। गर्मी के मौसम में महीने में करीब साढ़े चार क्विंटल उत्पादन होता है, जबकि सर्दियों में यह बढ़कर 12 क्विंटल प्रति माह तक पहुंच जाता है। बारिश के सीजन में पौधों की छंटाई की जाती है, जिसके बाद पौधों में दोबारा नया अंकुरण शुरू हो जाता है। ज्यादा मुनाफा पंखुड़ियों के प्रोसेसिंग में किसान ने बताया कि ताजा गुलाब का फूल करीब 40 रुपए किलो तक बिकता है, लेकिन वे इसे मंडी में बेचने के बजाय पंखुड़ियों को अलग कर सुखाते हैं। करीब तीन किलो गीले गुलाब से एक किलो सूखा गुलाब तैयार होता है। पंखुड़ियां सूखने के बाद मशीन से पीसकर पाउडर बनाया जाता है, जो 400 से 700 रुपए किलो तक बिकता है। इस पाउडर की मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों में काफी डिमांड रहती है। मंडी से यह विदेशों तक एक्सपोर्ट भी किया जाता है। बिजली फूल की खेती- मांग के अनुसार किया चयन बिजली के फूल की खेती के बारे में किसान ने बताया कि नर्सरी में तैयार पौधे सीधे खेत में लगाए जाते हैं। करीब 2000 रुपए में 3000 पौधे खरीदकर डेढ़ बीघा जमीन में लगाए गए। इस फूल में खुशबू नहीं होती, लेकिन मुस्लिम समाज में इसकी अच्छी डिमांड रहती है, इसी को देखते हुए इसकी खेती शुरू की गई। डेढ़ बीघा में उत्पादन और मंडी में अच्छा भाव बिजली के फूल से प्रति बीघा करीब सवा क्विंटल उत्पादन मिलता है। तैयार फूलों का मंडी में प्रति किलो करीब 45 रुपए तक भाव मिल जाता है, जिससे यह फसल भी किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। — खेती-किसानी से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… कम पानी में कुसुम की खेती, फूल-बीज दोनों से कमाई:दावा- लागत कम और प्रॉफिट ज्यादा; जानें- क्यों बढ़ रही डिमांड राजस्थान के शुष्क और कम उपजाऊ जमीन वाले क्षेत्रों में कुसुम (सैफ्लावर) की खेती नई उम्मीद है। सवाईमाधोपुर में पहली बार एक हेक्टेयर में प्रयोग किया है। पूरी खबर पढ़िए



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