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मान्यता है कि त्रेता युग में इसी स्थान पर राजा दशरथ का विशाल महल और किलाबंद राज परिसर हुआ करता था. यही वह पवित्र भूमि मानी जाती है जहां भगवान श्रीराम का जन्म हुआ और उनका बाल्यकाल बीता.इसी कारण समय के साथ यह पूरा क्षेत्र रामकोट कहलाने लगा धर्माचार्य पवन दास शास्त्री के अनुसार रामकोट का इतिहास अत्यंत प्राचीन है.
अयोध्या: रामनगरी अयोध्या में जहां आज भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर बनकर तैयार हुआ है उस पूरे क्षेत्र को रामकोट के नाम से जाना जाता है. सदियों पुराना यह नाम केवल एक मोहल्ले की पहचान नहीं बल्कि त्रेता युग से जुड़ी आस्था इतिहास और पौराणिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है. दरअसल, रामकोट दो शब्दों से मिलकर बना है राम और कोट यहां राम का संबंध भगवान श्रीराम से है, जबकि कोट का अर्थ किला या दुर्ग होता है.
क्या है मान्यताएं
मान्यता है कि त्रेता युग में इसी स्थान पर राजा दशरथ का विशाल महल और किलाबंद राज परिसर हुआ करता था. यही वह पवित्र भूमि मानी जाती है जहां भगवान श्रीराम का जन्म हुआ और उनका बाल्यकाल बीता. इसी कारण समय के साथ यह पूरा क्षेत्र रामकोट कहलाने लगा धर्माचार्य पवन दास शास्त्री के अनुसार रामकोट का इतिहास अत्यंत प्राचीन है. उनका कहना है कि यह स्थल सतयुग काल से पूजनीय माना जाता रहा है. लेकिन त्रेता युग में यहां राजा दशरथ का महल और राजकोट स्थापित था. उस समय पूरा इलाका सुरक्षा की दृष्टि से किलाबंद रहता था. राजपरिवार का निवास कोषागार और प्रशासनिक गतिविधियां भी इसी क्षेत्र में संचालित होती थीं.
रामकोट को माना जाता है बेहद पवित्र
मान्यता यह भी है कि भगवान श्रीराम जब अयोध्या के राजा बने तब भी इसी राजमहल परिसर में निवास करते थे. यही वजह है कि रामकोट को केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि रामराज्य की राजधानी का केंद्र भी माना जाता है. आज भी लगभग पांच किलोमीटर के दायरे वाले इस क्षेत्र को अत्यंत पवित्र माना जाता है.
रामकोट की परिक्रमा से जीवन के कष्ट होते हैं दूर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रामकोट की परिक्रमा करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. श्रद्धालु मानते हैं कि यहां की परिक्रमा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है.यही कारण है कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु राम मंदिर दर्शन के साथ रामकोट क्षेत्र की परिक्रमा भी करते हैं.रामकोट केवल एक स्थान का नाम नहीं बल्कि भगवान श्रीराम के जीवन, अयोध्या की गौरवशाली परंपरा और सनातन आस्था का जीवंत प्रतीक माना जाता है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

