Thursday, May 14, 2026
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डॉलर के आगे कमजोर पड़ता रुपया, मई के आखिर तक क्या हो सकता है हाल?


भारतीय रुपया गुरुवार 14 मई के कारोबारी सेशन में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर 95.93 पर पहुंच गया है. भारतीय रुपया 1 महीने में 3 रुपये कमजोर हुआ है और 27 फरवरी के बाद से अब तक करीब 5 रुपये कमजोर हुआ है. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर दबाव बढ़ता दिख रहा है.

हालांकि, सुबह के कारोबार में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद रुपये में कुछ सुधार देखने को मिला. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत विदेशी बॉन्ड निवेशकों पर लगने वाले टैक्स में कटौती पर विचार कर रहा है, ताकि विदेशी निवेश बढ़ सके और रुपये को सहारा मिल सके.

मिडिल ईस्ट टेंशन का असर

अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बाद भारतीय रुपये पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है. इस युद्ध की शुरुआत के बाद से रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 5% कमजोर हो चुका है. 2 मार्च को रुपया जहां करीब 91.67 के स्तर पर था, वहीं गुरुवार को यह गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया.

जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश ऑप्शन की तरफ रुख करते हैं. इसी वजह से डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी और अन्य सुरक्षित एसेट्स की मांग बढ़ रही है, जबकि उभरते बाजारों और उनकी मुद्राओं से निवेशक दूरी बना रहे हैं.

Investing.com के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में रुपया करीब 6% कमजोर हुआ है. वहीं, सिर्फ पिछले एक हफ्ते में ही इसमें लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी बड़ी वजह बढ़ते वैश्विक तनाव और बाजार में बढ़ी अनिश्चितता मानी जा रही है.

कच्चे तेल का असर

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भी रुपये पर साफ दिखाई दे रहा है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होता है.

विदेशी निवेशक बना रहे बाजारों से दूरी

सोना, चांदी, खाद और धातुओं के इंपोर्ट भी महंगे हो गए हैं. ग्लोबल सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों और बढ़ती कीमतों के कारण भारत का इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा है. वहीं, विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं. वे भारतीय शेयर और बॉन्ड बेचकर डॉलर में रकम वापस ले जा रहे हैं, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ता दिख रहा है.

भारतीय रुपया में मई अंत तक दिख सकता है ये लेवल

CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, केडिया कमोडिटी कॉमट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और निदेशक के अजय केडिया के मुताबिक, पिछले एक साल में रुपये में करीब 14% की गिरावट देखने को मिली है. उनका मानना है कि मई के अंत तक डॉलर के मुकाबले रुपया 96.40 के रेजिस्टेंस लेवल तक पहुंच सकता है. यानी अभी आने वाले हफ्ते में और गिरावट हावी हो सकती है.



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