Saturday, May 16, 2026
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सिंधु के बाद दोहरी मार, 2 नई सुरंगों पर काम कर रहा भारत, पाकिस्तान पर प्रलय तय


पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान को लेकर अपनी रणनीति और सख्त कर रखी है. एक तरफ भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर अलग-थलग करने की कोशिशों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ अपने जल संसाधनों और हाइड्रोपावर क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भी बड़े कदम तेज कर दिए हैं. केंद्र सरकार ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित रखने का फैसला लेकर पाकिस्तान को साफ संदेश दिया है कि सीमा पार आतंकवाद और जल सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अब भारत पहले से ज्यादा आक्रामक रणनीति अपनाएगा.

सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पिछले एक साल से केंद्र सरकार पश्चिमी नदियों पर जल प्रबंधन और हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म योजनाओं पर काम कर रही है. इसका मकसद भारत के हिस्से के पानी का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित करना और भविष्य की जरूरतों के लिए जल भंडारण क्षमता बढ़ाना है.

सलाल डैम पर डी-सिल्टिंग शुरू

इसी दिशा में सलाल डैम में बड़े स्तर पर डी-सिल्टिंग यानी गाद हटाने का काम शुरू कर दिया गया है. अधिकारियों के अनुसार, एनएचपीसी ने ड्रेजिंग ऑपरेशन शुरू कर दिया है और इस साल से बड़े पैमाने पर सिल्ट फ्लशिंग भी की जाएगी. यह अभियान अगले तीन से चार वर्षों तक लगातार चल सकता है.

सूत्रों के मुताबिक, हर साल करीब 40 से 50 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद हटाने का लक्ष्य रखा गया है. इससे जलाशय की क्षमता बढ़ेगी, पानी के बेहतर भंडारण में मदद मिलेगी और बिजली उत्पादन की दक्षता भी सुधरेगी.

तेजी से बढ़ रहा हाइड्रोपावर का काम

भारत पश्चिमी नदियों पर अपनी हाइड्रोपावर क्षमता भी तेजी से बढ़ा रहा है. वर्तमान में एनएचपीसी पश्चिमी नदियों पर 2,219 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का संचालन कर रही है, जबकि 3,514 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं.

अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को भी बड़े पैमाने पर फायदा हो रहा है. जिन राज्यों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट लगाए जाते हैं, उन्हें परियोजनाओं से 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली मिलती है. इसके अलावा हर बड़ी परियोजना से करीब 5,000 से 6,000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है. खास बात यह है कि निर्माण कार्य में करीब 80 प्रतिशत कर्मचारी उसी राज्य के होते हैं, जहां परियोजना बनाई जा रही है.

दो सुरंगों का सर्वे पूरा

जम्मू-कश्मीर में तैयार होने वाली स्वच्छ और हरित ऊर्जा का इस्तेमाल केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं है. यह बिजली उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों को सप्लाई की जा रही है और राष्ट्रीय पावर ग्रिड को मजबूती दे रही है. सूत्रों ने यह भी बताया कि व्यापक जल प्रबंधन रणनीति के तहत प्रस्तावित दो सुरंगों को लेकर सर्वे का काम पूरा हो चुका है. फिलहाल दोनों परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है, जिसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा.

माना जा रहा है कि पहलगाम हमले के बाद भारत अब आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि जल और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक रणनीतिक बढ़त बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.



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