Sunday, May 17, 2026
Homeराज्यबिहारनालंदा यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय 'शास्त्रार्थ 2026' का आयोजन: देश-विदेश के...

नालंदा यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय ‘शास्त्रार्थ 2026’ का आयोजन: देश-विदेश के विद्वानों ने रखे अपने विचार, कहा- शिक्षा को एआई के भरोसे छोड़ नहीं सकते – Nalanda News




प्राचीन नालंदा महाविहार की समृद्ध और गौरवशाली बौद्धिक परंपरा को समकालीन अकादमिक जीवन में पुनर्स्थापित करने की दिशा में नालंदा विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक पहल की है। तृतीय स्नातकोत्सव(दीक्षांत) समारोह के अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में दो दिवसीय ‘शास्त्रार्थ 2026’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के इतिहास में यह पहली बार है जब शास्त्रार्थ की इस कालजयी परंपरा को औपचारिक रूप से शैक्षणिक कैलेंडर में स्थान दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा की उस जीवंत भावना को जागृत करना है। उद्घाटन समारोह की शुरुआत पारंपरिक स्नातक मंगल गान के साथ हुई, जिसके बाद कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने जनसमूह को संबोधित किया। ज्ञान सत्र का भी आयोजन उद्घाटन के बाद ‘शास्त्रार्थ की परंपरा: इतिहास, व्यवहार और समकालीन प्रासंगिकता’ विषय पर एक विशेष ज्ञान सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वानों ने हिस्सा लिया। इस बौद्धिक संवाद में भारतीय दर्शन अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद मिश्रा, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के निदेशक डॉ. मयंक शेखर मिश्रा, नालंदा विश्वविद्यालय के विशिष्ट विजिटिंग प्रोफेसर प्रो. असंग तिलकरत्ने, जैन धर्म के विद्वान विशाल ताराचंद गड़ा सहित विश्वविद्यालय के अलग-अलग संकायों के डीन प्रो. गोदाबरिश मिश्रा और प्रो. डी. वेंकट राव ने अपने विचार साझा किए। शिक्षा को एआई के भरोसे छोड़ नहीं सकते कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा कि नालंदा में शिक्षा को केवल शोध प्रबंध जमा करने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। शिक्षा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि वास्तविक ज्ञान का उदय बौद्धिक संघर्ष, गहन विमर्श और आत्मचिंतन से ही संभव है। हमारी सभ्यता ने कभी नैतिकता को शासन से या ज्ञान को सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं माना। आज धर्म, अर्थ और नीति की खोज उसी समग्र सभ्यतागत दृष्टि को फिर से समझने का एक ईमानदार प्रयास है। 23 विषयगत शास्त्रार्थ सत्र का आयोजन दो दिनों तक चलने वाले इस ज्ञान महाकुंभ में बौद्ध अध्ययन, हिंदू अध्ययन, पुरातत्व, पारिस्थितिकी, अंतरराष्ट्रीय संबंध, सतत विकास, साहित्य और दर्शन जैसे विविध विषयों पर कुल 23 विषयगत शास्त्रार्थ सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। पूर्वपक्ष और उत्तरपक्ष की पारंपरिक वैचारिक संरचना पर आधारित ये सत्र विद्यार्थियों और पूर्व छात्रों को अनुशासित तर्क, आलोचनात्मक संवाद और सहयोगात्मक चिंतन के लिए एक अनूठा मंच प्रदान कर रहे हैं। जो पूरी तरह से प्रमाण, तर्क और शील जैसे मूलभूत सिद्धांतों पर टिके हैं। इस दीक्षांत शास्त्रार्थ के अंतर्गत विश्वविद्यालय की ओर से जिज्ञासा और संवाद की भावना को सींचने वाले शिक्षकों के लिए ‘नालंदा शास्त्रार्थ सम्मान’ और उत्कृष्ट बौद्धिक विमर्श प्रदर्शित करने वाले विद्यार्थियों के लिए ‘नालंदा शास्त्रार्थ पुरस्कार’ की भी घोषणा की गई है। इस वैचारिक मंथन के समापन के बाद 19 मई को औपचारिक स्नातकोत्सव समारोह आयोजित होगा, जिसमें स्नातक विद्यार्थियों को प्राचीन नालंदा की मूल भावना के साथ डिग्रियां प्रदान की जाएंगी।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments