Wednesday, May 20, 2026
Homeराज्यराजस्तानझुंझुनूं में गूंजी संविधान और सामाजिक न्याय की आवाज: राष्ट्रपति के...

झुंझुनूं में गूंजी संविधान और सामाजिक न्याय की आवाज: राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन, मॉब लिंचिंग रोकने, जातिगत जनगणना कराने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा समेत रखीं 11 मांगें – Jhunjhunu News




देश में संविधान की रक्षा, सामाजिक सौहार्द और नागरिक समानता के मुद्दों को लेकर आज झुंझुनूं शहर में भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। देशव्यापी आंदोलन के हिस्से के रूप में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के बाद, दोनों संगठनों के पदाधिकारियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने देश में अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़ों के अधिकारों की रक्षा के लिए 11 सूत्रीय मांगें रखी हैं और राष्ट्रपति से इस पूरे मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। ​देश की बहुलतावादी पहचान पर खतरा ​प्रदर्शन के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मोर्चा के जिला संयोजक नजमुद्दीन और प्रदेश महासचिव ने कहा कि आज देश एक बेहद संवेदनशील और नाजुक दौर से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में संविधान के मूल सिद्धांतों को दरकिनार करके ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं, जो देश की अखंडता, विविधता और समानता के अधिकार पर सीधे सवाल खड़े करते हैं। ​ज्ञापन में शामिल 11 मुख्य मांगें
​संविधान विरोधी कानूनों की वापसी: CAA, UCC और वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 जैसे कानूनों को तत्काल रद्द किया जाए, क्योंकि ये देश के मूल ढांचे और बहुलतावादी पहचान के खिलाफ हैं। ​धार्मिक स्वतंत्रता का पूर्ण पालन: संविधान के अनुच्छेद 25, 26, 27, 28 और 29 के तहत नागरिकों को मिले पूजा, प्रबंधन, शिक्षा और संस्कृति के अधिकारों में किसी भी प्रकार का सरकारी या बाहरी हस्तक्षेप बंद हो। ​मॉब लिंचिंग पर रोक: मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हिंसा) और फर्जी गौकशी के नाम पर होने वाली हिंसा व हत्याओं पर सख्त कार्रवाई हो। ​बेगुनाह युवाओं की रिहाई: सिर्फ शक और झूठे आरोपों के आधार पर जेलों में बंद मुस्लिम और ईसाई युवाओं, स्कॉलर्स और उलमा-ए-दीन के मामलों की निष्पक्ष जांच कराकर उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। ​कम्यूनल वायलेंस प्रिवेंशन एक्ट: धर्म के आधार पर होने वाले अन्याय, दंगों और अत्याचार को रोकने के लिए ‘कम्यूनल वायलेंस प्रिवेंशन एक्ट’ (सांप्रदायिक हिंसा रोकथाम कानून) बनाकर इसे तत्काल लागू किया जाए। ​धार्मिक स्थलों की सुरक्षा: देश में मस्जिद, मदरसा, दरगाह और अन्य इबादतगाहों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए कठोर कानून बनाया जाए। ​प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट का कड़ाई से पालन: ‘प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ (उपासना स्थल कानून) का पूरी कड़ाई से पालन हो और सभी धार्मिक स्थलों की 15 अगस्त 1947 वाली स्थिति को बरकरार रखा जाए। ​अनुच्छेद-341(3) की पाबंदी हटे: धर्म के आधार पर आरक्षण से वंचित करने वाली पाबंदी को हटाया जाए।
​जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी: SC, ST, OBC और माइनॉरिटी (अल्पसंख्यक) समाज को उनकी वास्तविक जनसंख्या के अनुपात में देश के शासन, प्रशासन, शिक्षा और रोजगार में पूरा प्रतिनिधित्व मिले। ​जाति आधारित जनगणना: जाति आधारित जनगणना कराई जाए ताकि संख्या के अनुपात में सबकी हिस्सेदारी तय हो सके। ​नफरत फैलाने वाले संगठनों पर बैन: धर्म, जाति और नफरत के नाम पर हिंसा भड़काने वाले संगठनों को बैन किया जाए।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments