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Bharat Taxi : भारत टैक्सी ने ड्राइवर-ओन्ड मॉडल को धरातल पर उतारकर यह सुनिश्चित किया है कि राइड की 100 प्रतिशत कमाई बिना किसी कटौती के सीधे ड्राइवर्स तक पहुंचे. इसके साथ ही इसका किराया भी ओला-उबर से कम है.
भारत टैक्सी ने किराया संरचना को स्थिर और पारदर्शी रखा है.
नई दिल्ली. जब भी भारत में सहकारिता या ‘कोऑपरेटिव’ शब्द का जिक्र होता है, तो सबसे पहले श्वेत क्रांति लाने वाले ‘अमूल’ (Amul) ब्रांड का चेहरा सामने आता है. लेकिन अब एक और कोऑरेटिव भी सफलता के झंडे गाड़ रही है जिसका नाम है भारत टैक्सी. 5 फरवरी को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च की गई भारत टैक्सी महज तीन महीने के भीतर दुनिया की सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव के रूप में उभरकर सामने आई है.
35 लाख से ज्यादा ग्राहकों ने इस स्वदेशी ऐप को डाउनलोड किया है. गुजरात में 1 लाख से अधिक चालकों समेत देशभर में 6 लाख से अधिक सारथी इस कोऑपरेटिव का हिस्सा बन चुके हैं. भारत टैक्सी की लगातार विस्तार कर रही है. गुजरात में अहमदाबाद और सूरत के बाद अब यह वडोदरा में अपनी सर्विस शुरू करने जा रही है.
क्यों लोकप्रिय हो रही है भारत टैक्सी
भारत टैक्सी के चेयरमैन और अमूल के एमडी जयेन मेहता इस बदलाव को एक बड़ी क्रांति के रूप में देखते हैं. उनके अनुसार, “भारत टैक्सी ने ड्राइवर-ओन्ड मॉडल को धरातल पर उतारकर यह सुनिश्चित किया है कि राइड की 100 प्रतिशत कमाई बिना किसी कटौती के सीधे ड्राइवर्स तक पहुंचे. आज यह दुनिया की सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव के रूप में उभरकर न केवल सारथियों की गरिमा बहाल कर रही है, बल्कि ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को वैश्विक स्तर पर एक नया बेंचमार्क दे रही है.”
ड्राइवरों की कमाई ज्यादा
भारत टैक्सी मोबिलिटी सेक्टर के उस पुराने ढर्रे को ध्वस्त कर दिया जिसमें ड्राइवर्स को कम कमाई होती है और ज्यादा फायदा कंपनियों को. भारत टैक्सी में कोई बिचौलिया या कॉर्पोरेट नहीं है, बल्कि सारथी यानी ड्राइवर ही इस कोऑपरेटिव के स्टेकहोल्डर्स हैं. इसका सीधा असर उनकी आय पर दिखता है. प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद एक औसत सारथी की मासिक आय में 25 से 30 प्रतिशत तक का उछाल आया है.

