नई दिल्ली. सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 6 सेक्टर पर जोर देने की बात कही है. इसके लिए विशिष्ट कार्य समूह बनाए हैं, जो 100 उत्पादों की पहचान करेंगे. मामले से जुड़े अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य इन उत्पादों का स्वदेशीकरण बढ़ाना और आयात पर निर्भरता घटाना है. ये समूह इस उद्देश्य के लिए उत्पादों की सूची पर चर्चा करेंगे और उनके द्वारा तैयार की गई अंतिम सूची तीन हफ्ते के भीतर कैबिनेट सचिवालय को सौंपी जाएगी.
सरकार ने जिन 6 सेक्टर्स को चुना है उसमें फार्मास्युटिकल्स, बायोटेक और मेडिकल डिवाइसेज, केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र और फुटवियर, पूंजीगत वस्तुएं, ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक वाहन, एडवांस कैपिटल प्रोडक्ट, ऊर्जा, निर्माण उपकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और एयरोस्पेस (सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए) और इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित हैं. इन समूहों के सदस्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से हैं, जिनमें वाणिज्य, डीपीआईआईटी, नीति आयोग, फार्मास्युटिकल्स, आर्थिक मामलों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, केमिकल्स, वस्त्र, भारी उद्योग, पोर्ट्स और शिपिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, सड़क परिवहन, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, और तेल शामिल हैं.
कैसे कम होगी आयात पर निर्भरता
इन समूहों की अध्यक्षता उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव करेंगे. ये समूह उन उत्पादों की पहचान करेंगे, जो या तो भारत में निर्मित नहीं होते या देश की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते. इसका उद्देश्य घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों के लिए विनिर्माण का विस्तार करना है. इस कदम का मकसद विदेशी मुद्रा के बहाव को भी कम करना है, क्योंकि इससे भारतीय मुद्रा की कीमत पर असर पड़ रहा है. 2025-26 में भारत का आयात 7.5 फीसदी बढ़कर 775 अरब डॉलर हो गया.
कहां खर्च हो रहा भारत का पैसा
पिछले वित्तवर्ष में भारत द्वारा मुख्य रूप से जिन उत्पादों का आयात किया गया, उनमें कच्चा तेल (174 अरब डॉलर), वनस्पति तेल (19.5 अरब डॉलर), उर्वरक (16 अरब डॉलर), अयस्क और खनिज (14.12 अरब डॉलर), कोयला, कोक और ब्रिकेट्स (27.9 अरब डॉलर), केमिकल्स (लगभग 28 अरब डॉलर), कृत्रिम रेजिन, प्लास्टिक सामग्री (22.75 अरब डॉलर), मशीनरी (61.73 अरब डॉलर), परिवहन उपकरण (34.75 अरब डॉलर) और इलेक्ट्रॉनिक सामान (116.2 अरब डॉलर) शामिल हैं.

