नई दिल्ली. पंजाब में अगर डेयरी उत्पादों की बात होती है तो सबसे पहले जिन नामों का जिक्र आता है, उनमें वेर्का सबसे ऊपर रहता है. दशकों से यह ब्रांड दूध, दही, घी, लस्सी और दूसरे डेयरी उत्पादों के जरिए लोगों के घरों तक पहुंच रहा है. आज यह सिर्फ एक ब्रांड नहीं बल्कि लाखों किसानों और उपभोक्ताओं के बीच भरोसे का प्रतीक माना जाता है. इसी वेर्का का नाम हाल ही में एक विवादित सोशल मीडिया विज्ञापन की वजह से सुर्खियों में आ गया. मैंगो लस्सी के प्रचार के लिए जारी एक रील पर लोगों ने नाराजगी जताई और देखते ही देखते मामला सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया. हालांकि इस विवाद से इतर वेर्का की कहानी कहीं ज्यादा बड़ी और दिलचस्प है.
विवाद वेर्का की मैंगो लस्सी के एक सोशल मीडिया विज्ञापन से शुरू हुआ. कंपनी के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट की गई रील में एक युवती दिखाई गई थी और स्क्रीन पर ‘How to kidnap me?’ जैसी टैगलाइन लिखी गई थी. वीडियो में दिखाया गया कि एक हाथ युवती को वेर्का मैंगो लस्सी का पैक ऑफर करता है और वह आखिरकार उसे स्वीकार कर लेती है. इस प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर विषय को प्रचार का माध्यम बनाना गलत है.
विरोध बढ़ा तो कंपनी ने लिया एक्शन
जैसे ही विवाद बढ़ा, लोगों ने विज्ञापन को असंवेदनशील करार देना शुरू कर दिया. कई उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर इतने बड़े ब्रांड में ऐसी सामग्री की समीक्षा कैसे नहीं हुई. मिल्कफेड के प्रबंध निदेशक राहुल गुप्ता ने बाद में स्वीकार किया कि यह प्रचार का उचित तरीका नहीं था. विवाद बढ़ने के बाद संबंधित रील को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया. साथ ही विज्ञापन तैयार करने वाली एजेंसी को नोटिस जारी किया गया और भविष्य में विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त बनाने का फैसला लिया गया.
आखिर कितना बड़ा है वेर्का ब्रांड?
विज्ञापन विवाद से अलग अगर वेर्का की बात करें तो यह पंजाब के सबसे बड़े सहकारी डेयरी ब्रांड्स में से एक है. यह ब्रांड पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड यानी मिल्कफेड के तहत संचालित होता है. उत्तर भारत के कई राज्यों में वेर्का के उत्पाद व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं. दूध और डेयरी उत्पादों की दुनिया में इसकी पहचान गुणवत्ता और भरोसे के लिए बनाई गई है.
कैसे हुई थी शुरुआत?
वेर्का की कहानी पंजाब में डेयरी किसानों को बेहतर दाम दिलाने के उद्देश्य से शुरू हुई थी. वर्ष 1973 में मिल्कफेड की स्थापना हुई और इसके जरिए किसानों को सीधे डेयरी नेटवर्क से जोड़ने की व्यवस्था बनाई गई. ब्रांड का नाम अमृतसर के पास स्थित वेर्का नामक स्थान से लिया गया, जहां इस सहकारी डेयरी मॉडल का शुरुआती मिल्क प्लांट स्थापित किया गया था. धीरे धीरे यही नाम पंजाब के सबसे पहचान वाले डेयरी ब्रांड में बदल गया.
साढ़े तीन लाख किसानों से जुड़ा नेटवर्क
आज वेर्का का नेटवर्क पंजाब के ग्रामीण इलाकों तक फैला हुआ है. कंपनी से 3.5 लाख से अधिक डेयरी किसान जुड़े हुए हैं जो सीधे दूध की आपूर्ति करते हैं. पूरी व्यवस्था सहकारी मॉडल पर काम करती है. गांव स्तर पर दूध उत्पादक समितियां, जिला स्तर पर मिल्क यूनियन और राज्य स्तर पर मिल्कफेड मिलकर इस नेटवर्क को संचालित करते हैं. यही मॉडल किसानों को बिचौलियों से बचाकर बेहतर आय दिलाने में मदद करता है.
रोज लाखों लीटर दूध संभालने की क्षमता
वेर्का के पास पंजाब में 10 से अधिक आधुनिक मिल्क प्लांट हैं. इनकी कुल मिल्क हैंडलिंग क्षमता लगभग 30 लाख लीटर प्रतिदिन है. इसके अलावा कंपनी के पास कैटल फीड प्लांट, फॉडर सीड प्रोसेसिंग यूनिट और अत्याधुनिक आइसक्रीम प्लांट भी हैं. यही कारण है कि वेर्का केवल दूध तक सीमित नहीं है बल्कि एक बड़ा डेयरी इकोसिस्टम बन चुका है.
सिर्फ दूध नहीं, उत्पादों की लंबी श्रृंखला
वेर्का के उत्पादों की सूची काफी बड़ी है. कंपनी दूध, दही, लस्सी, पनीर, मक्खन, घी, खीर और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसे उत्पाद बेचती है. इसके अलावा आइसक्रीम, मिल्क केक, पिन्नी, गुलाब जामुन और दूसरी पारंपरिक मिठाइयां भी इसके पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं. खास तौर पर वेर्का का घी देश और विदेश दोनों बाजारों में काफी लोकप्रिय माना जाता है.
विदेशों तक पहुंच चुका है ब्रांड
वेर्का की मौजूदगी अब केवल पंजाब तक सीमित नहीं है. इसके उत्पाद हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच चुके हैं. साथ ही कंपनी अपने प्रीमियम उत्पादों, खासकर घी, का निर्यात खाड़ी देशों, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड और मलेशिया जैसे बाजारों में भी करती है. इससे यह पंजाब के सबसे सफल सहकारी ब्रांड्स में शामिल हो चुका है.
विवाद के बीच भी बनी हुई है मजबूत पहचान
हालिया विज्ञापन विवाद ने जरूर वेर्का को मुश्किल स्थिति में ला दिया है, लेकिन इसकी मूल पहचान अब भी एक किसान आधारित सहकारी डेयरी ब्रांड की है. लाखों उपभोक्ताओं और हजारों गांवों से जुड़ा यह नेटवर्क पंजाब की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. यही वजह है कि एक सोशल मीडिया रील पर उठे विवाद के बावजूद चर्चा सिर्फ विज्ञापन तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों ने वेर्का की पूरी कहानी और उसकी भूमिका को भी नए सिरे से जानना शुरू कर दिया.

