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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबर ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत दी है. कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर पांच हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़े भरोसे और भारतीय रिजर्व बैंक के हालिया कदमों ने भी रुपये को सहारा दिया है. अब निवेशकों और कारोबारियों की नजर इस बात पर है कि क्या आने वाले दिनों में रुपया और मजबूती दिखा पाएगा.
डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया, कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट का असर. (Representative Image: AI)
नई दिल्ली. इस सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय मुद्रा ने लगातार दूसरे दिन मजबूती दिखाई. सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 0.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 94.71 पर बंद हुआ. पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.11 पर बंद हुआ था. कारोबार के दौरान रुपया 94.4625 तक पहुंच गया, जो पिछले पांच हफ्तों का सबसे मजबूत स्तर माना जा रहा है. इससे पहले पिछले महीने भारतीय मुद्रा लगभग 97 रुपये प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गई थी, जिससे निवेशकों और आयातकों की चिंता बढ़ गई थी.
अमेरिका-ईरान समझौते से मिला बड़ा सहारा
रुपये की इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर हुआ प्रारंभिक समझौता माना जा रहा है. दोनों देशों ने तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं. यह समुद्री मार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसके खुलने से वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल बना और निवेशकों का भरोसा बढ़ा. इसका सकारात्मक असर भारतीय मुद्रा पर भी साफ दिखाई दिया.
तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में कमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर मानी जाती है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 5 प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई. तेल सस्ता होने से भारत का आयात बिल कम हो सकता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव घटेगा. यही वजह है कि रुपये को अतिरिक्त मजबूती मिली और बाजार में सकारात्मक माहौल बना.
आरबीआई के कदम भी दिखा रहे असर
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 5 जून को उठाए गए कदमों का असर अब दिखाई देने लगा है. केंद्रीय बैंक ने उस समय ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, लेकिन डॉलर प्रवाह बढ़ाने के लिए कुछ उपायों की घोषणा की थी. इन कदमों से विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद बनी. अर्थशास्त्रियों ने अब भारत के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) को लेकर अपने अनुमान भी बेहतर किए हैं और बड़े घाटे की जगह हल्के अधिशेष की संभावना जताई है.
क्या आगे और मजबूत होगा रुपया?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये को और समर्थन मिल सकता है, लेकिन इसकी चाल एकतरफा नहीं रहेगी. कुछ विश्लेषकों के अनुसार निकट भविष्य में रुपया 93.25 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है. हालांकि इसकी दिशा काफी हद तक आरबीआई की रणनीति, विदेशी निवेश के प्रवाह और वैश्विक तेल कीमतों पर निर्भर करेगी. केंद्रीय बैंक भी रुपये की मजबूती का उपयोग अपने बड़े विदेशी मुद्रा फॉरवर्ड पोर्टफोलियो को संतुलित करने के लिए कर सकता है.
भारतीय मुद्रा के लिए फिलहाल हालात पहले की तुलना में काफी बेहतर दिखाई दे रहे हैं. पश्चिम एशिया में शांति की संभावना, सस्ता होता तेल और आरबीआई की नीतियों का समर्थन मिलकर रुपये को नई ताकत दे रहे हैं. यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भारतीय मुद्रा और मजबूत हो सकती है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को भी अतिरिक्त सहारा मिलेगा.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

