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UPI Transactions : संसद में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक पास हुआ है. नए बिल में डिजिटल पेमेंट पर मिलने वाली चार्ज-फ्री छूट की समीक्षा करने की बात कही गई है. बिल पास होने के बाद से ही ये अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि यूपीआई पेमेंट पर भी शुल्क लग सकता है. हालांकि सरकार और एनपीसीआई साफ कर चुके हैं कि आम आदमी को कोई शुल्क नहीं देना होगा.
यूपीआई पेमेंट पर शुल्क लगाने की अटकलें चल रही हैं.
नई दिल्ली. संसद में हाल ही में पारित हुए नए टैक्स संशोधन बिल के बाद आप भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि चाय की टपरी से लेकर किराना दुकान तक हर यूपीआई ट्रांसफर पर जेब ढीली करनी पड़ेगी, तो आपके लिए राहत भरी बड़ी खबर है. देश में होने वाले 95 फीसदी से अधिक यूपीआई ट्रांजेक्शन पूरी तरह ‘फ्री’ रहेंगे. पेमेंट इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, भारत में UPI के जरिए होने वाले दैनिक भुगतानों का एक बड़ा हिस्सा छोटी राशि का होता है. वित्त वर्ष 2025-26 में पर्सन टू मर्चेंट (P2M) के बीच हुए कुल UPI पेमेंट्स में से केवल 4% लेनदेन ही ₹2,000 से अधिक के थे. इसलिए किराना दुकान, सब्जी विक्रेता से लेकर छोटे व्यापारियों को किए जाने वाले छोटे भुगतानों पर किसी भी तरह का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR लगने की कोई संभावना नहीं है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किराना दुकानों पर होने वाले लेनदेन की औसत राशि ₹100 से ₹200 के बीच होती है. इन सभी छोटे भुगतानों को पूरी तरह से शुल्क-मुक्त रखा जाएगा. एमडीआर वह शुल्क है जो बैंक और पेमेंट कंपनियां भुगतान की प्रोसेसिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए लेती हैं. संभावित MDR केवल शॉपिंग मॉल, बड़ी ई-कॉमर्स वेबसाइटों और उन बड़े कॉर्पोरेट्स पर लग सकता है जिनका सालाना टर्नओवर काफी अधिक (जैसे ₹50 करोड़ से ऊपर) है.
वित्त मंत्री भी कर चुकी इंकार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी यह साफ कर चुकी हैं कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की स्टीयरिंग कमेटी ने अभी एमडीआर पर कोई अंतिम फैसला नहीं किया है. अगर यह लागू भी होता है, तो यह केवल बड़े मर्चेंट्स पर होगा, एंड-यूजर्स या ग्राहकों पर बिल्कुल नहीं. पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिय ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर केवल बड़े व्यापारियों और पेमेंट कंपनियों के बीच का समझौता होता है. आम ग्राहकों से यूपीआई इस्तेमाल करने के बदले कोई चार्ज कभी नहीं लिया जाएगा.
क्यों है एमडीआर की जरूरत?
वित्त वर्ष 2025-26 में 24,000 करोड़ से अधिक यूपीआई लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹314 लाख करोड़ रही. इस विशाल नेटवर्क को चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के चलाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने, फ्रॉड रोकने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UPI का विस्तार करने के लिए पेमेंट इंडस्ट्री को हर साल ₹15,000 करोड़ खर्च करने पड़ रहे हैं.

