चित्तौड़गढ़ जिले के लालजी का खेड़ा गांव में स्थित एक गेहूं पीसने की चक्की पर करीब 5 फीट लंबा भारतीय नाग (कोबरा) दिखाई दिया। जिस जगह यह कोबरा मिला, वहां रोज बड़ी संख्या में ग्रामीण गेहूं और अन्य अनाज पिसवाने के लिए आते हैं। ऐसे में जहरीले सांप के दिखाई देने पर लोगों ने सावधानी बरतते हुए इसकी सूचना वन्यजीव रेस्क्यू टीम को दी। समय रहते जानकारी मिलने से किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। मौके पर मौजूद लोगों ने सुरक्षित दूरी बनाकर रखी और रेस्क्यू टीम के पहुंचने का इंतजार किया। राहुल वानखेड़े ने किया रेस्क्यू, ग्रामीणों को भी किया जागरूक सूचना मिलने पर चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य राहुल वानखेड़े मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी सावधानी के साथ कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान आसपास काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्हें सांप से दूर रहने और भीड़ नहीं लगाने की सलाह दी गई। रेस्क्यू के बाद राहुल वानखेड़े ने बताया कि अधिकांश सांप बिना वजह इंसानों पर हमला नहीं करते। जब उन्हें खतरा महसूस होता है, तभी वे अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सांप को देखकर घबराने या उसे मारने की कोशिश करने के बजाय तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। कोबरा की अपनी खास पहचान, खेतों के लिए भी है उपयोगी राहुल वानखेड़े ने बताया कि भारतीय नाग देश के मुख्य विषैले सांपों में शामिल है। खतरा महसूस होने पर यह अपना फन यानी हुड फैला लेता है। इसके फन के पीछे चश्मे जैसा निशान दिखाई देता है, जो इसकी खास पहचान मानी जाती है। उन्होंने बताया कि कोबरा सहित कई अन्य सांप खेतों में चूहों की संख्या नियंत्रित करते हैं, जिससे किसानों की फसलों को फायदा होता है। इसी वजह से सांप पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन का जरूरी हिस्सा माने जाते हैं। काटने पर तुरंत इलाज जरूरी, प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया राहुल वानखेड़े के अनुसार कोबरा का जहर काफी प्रभावशाली होता है। इसके काटने के बाद 15 मिनट से 2 घंटे के भीतर सांस लेने में परेशानी, शरीर के कुछ हिस्सों में लकवे जैसे लक्षण या गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए सांप के काटने की स्थिति में बिना देरी किए हॉस्पिटल पहुंचना जरूरी है। रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद भारतीय नाग को सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया, ताकि वह अपने प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रह सके।
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