अलवर के सरिस्का पैलेस होटल और वन विभाग के बीच विवाद सामने आया है। होटल के मैनेजर प्रेमचंद्र शर्मा ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ थानागाजी थाने में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी, धमकी देने और ड्रोन के जरिए होटल की गोपनीयता भंग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, वन विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले को वन भूमि पर बिना अनुमति पौधारोपण करने से जुड़ा विवाद बताया है। गाली-गलौज और जातिसूचक टिप्पणी के लगाए आरोप होटल मैनेजर प्रेमचंद्र शर्मा के अनुसार, होटल के कर्मचारी जब भी होटल से बाहर निकलते हैं, तब वन विभाग के कर्मचारी उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और गाली-गलौज करते हैं। कर्मचारियों ने इसकी जानकारी होटल के सुपरवाइजर धर्मेंद्र जाटव को दी। आरोप है कि गुरुवार शाम होटल के सामने पौधारोपण को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। शिकायत में कहा गया है कि वन विभाग के कर्मचारी धर्मसिंह और कप्तान सिंह करीब 15 कर्मचारियों के साथ होटल पहुंचे। इस दौरान होटल स्टाफ के साथ गाली-गलौज की गई और सुपरवाइजर धर्मेंद्र जाटव के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। साथ ही कथित रूप से धमकी दी गई कि “बाहर निकलोगे तब बताएंगे।” मैनेजर का दावा है कि घटना के बाद डर के माहौल के चलते होटल के करीब 15 कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी। मैनेजर ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग के कर्मचारी अक्सर रात के समय ड्रोन कैमरे होटल परिसर के ऊपर उड़ाते हैं, जिससे होटल की गोपनीयता भंग होती है। उनका कहना है कि होटल में महिला कर्मचारी भी कार्यरत हैं और इस तरह की गतिविधियों से उनकी निजता प्रभावित होती है। DFO ने आरोपों को बताया निराधार वहीं, सरिस्का के डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने होटल प्रबंधन के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि होटल के कर्मचारी होटल परिसर से बाहर वन विभाग की भूमि पर गड्ढे खोदकर पौधारोपण करना चाहते हैं, जबकि उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि होटल परिसर के बाहर कोई कार्य करना है तो पहले विभाग से अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही ऐसे कार्य किए जा सकते हैं। डीएफओ का कहना है कि कई बार होटल प्रबंधन हरियाणा से बाउंसर बुलाकर वन भूमि पर गड्ढे खुदवाने का प्रयास करता है। जब वन विभाग के कर्मचारी उन्हें रोकते हैं तो होटल पक्ष ही कहासुनी पर उतर आता है। ड्रोन कैमरे के आरोपों पर डीएफओ ने कहा कि वन विभाग सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की मॉनिटरिंग और वन क्षेत्र की निगरानी के लिए नियमित रूप से ड्रोन का उपयोग करता है। उनका कहना है कि ड्रोन उड़ाने का उद्देश्य किसी होटल की निगरानी करना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और गश्त करना है। मामले में थानागाजी SHO रामस्वरूप का कहना है कि गुरुवार को शिकायत मिली थी। हम मामले की जांच कर रहे हैं।
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