Saturday, July 18, 2026
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बिहार में किराना दुकानदार के 3 बच्चों ने एक साथ क्रैक किया नीट, बेटी और दो बेटे बनेंगे डॉक्टर


बिहार के सहरसा में दुकानदार के तीन बच्चों ने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और कड़ी मेहनत से आर्थिक तंगी को दूर किया जा सकता है। एक साधारण परिवार के तीन भाई-बहनों ने, जो कोटा या दिल्ली में महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे, एक साथ नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पास किया है। उन्होंने साबित किया है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती।

तीनों बच्चों को मिले अच्छे नंबर

सहरसा के गांव तुलसियाही के रहने वाले किराना दुकानदार के बड़े बेटे रजनीश कुमार ने नीट परीक्षा में 633 अंक प्राप्त किया। बहन साक्षी कुमारी को 601 अंक मिले जबकि छोटे बेटे प्रह्लाद कुमार ने 565 अंक प्राप्त किए हैं। रजनीश कुमार, प्रह्लाद कुमार और उनकी बहन साक्षी ने अपने गृहनगर सहरसा में ही तैयारी करके यह उपलब्धि हासिल की। ​​उनकी शानदार सफलता पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है और देश भर के हजारों NEET उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

पिता चलाते हैं छोटी सी किराना की दुकान

रजनीश और प्रह्लाद ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, वहीं साक्षी ने बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड से पढ़ाई की। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बावजूद, तीनों का डॉक्टर बनने का सपना एक ही था। उनके पिता रोहित आनंद किराने की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। इससे परिवार का गुजारा चलता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण, बच्चों को कोटा या दिल्ली जैसे कोचिंग हब में भेजना परिवार की क्षमता से बाहर था।

Image Source : REPORTERदुकानदार के 3 बच्चों ने एक साथ क्रैक किया नीट

रोहित आनंद और उनकी पत्नी पूनम देवी ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों को ईमानदारी से बता दिया था कि वे उन्हें कोचिंग के लिए जिले से बाहर भेजने का खर्च नहीं उठा सकते। हालांकि, उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उनकी शिक्षा में मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इसके बाद भाई-बहनों ने सहरसा के एक स्थानीय कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया।

कोटा जाने के बजाय सहरसा में तैयारी की

तीनों भाई-बहनों ने कोटा या दिल्ली जाने की बजाय अपने गृहनगर में ही तैयारी करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अनुशासित पढ़ाई, समय के सही प्रबंधन और लगातार कड़ी मेहनत को दिया। भाई-बहनों ने बताया कि वे नियमित रूप से एक-दूसरे के साथ कठिन विषयों पर चर्चा करते थे और एक-दूसरे के संदेह दूर करते थे, जिससे उनकी समझ मजबूत हुई और तैयारी के दौरान वे प्रेरित रहे।

माता-पिता प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत थे


भाई-बहनों ने अपनी सफलता में माता-पिता के सबसे बड़े योगदान को माना। उन्होंने कहा कि तैयारी के तनावपूर्ण दौर में उनके माता-पिता ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें याद दिलाया कि सच्ची कोशिश कभी बेकार नहीं जाती। उनका अटूट समर्थन और भरोसा परिवार की सबसे बड़ी ताकत बन गया। बता दें कि 16 जुलाई को नीट यूजी परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया गया। 11 लाख से ज्यादा छात्रों ने काउंसलिंग के लिए क्वालिफाई किया है। 

 

रिपोर्टः संजीव कुमार 

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