दानापुर के बीएयू में तैयार 350 पौधों से बना बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में तैयार 350 सिंदूर के पौधों को दानापुर आर्मी कैंट में लगाकर देश का पहला सिंदूर पार्क बनाया गया है। विवि का कहना है कि पार्क भारतीय सेना की वीरता, पर्यावरण संरक्षण व आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का प्रतीक बनेगा। राज्यपाल-सह-कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, बीएयू के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह व दानापुर सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को संयुक्त रूप से पौधरोपण पार्क की शुरुआत की। राज्यपाल ने कहा कि सिंदूर पार्क सेना और नागरिक समाज के बीच बेहतर समन्वय का प्रतीक है। आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र निर्माण के साथ प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देगा। उन्होंने प्राकृतिक सिंदूर के संरक्षण और इसके व्यावसायीकरण के लिए बीएयू की सराहना की। कुलपति ने कहा कि यह देश का पहला आर्मी कैंट है जहां सिंदूर पार्क बनाया गया है। सिंदूर का लाल रंग मातृभूमि के प्रति समर्पण, अखंडता, और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। यह पार्क भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर की भावना को भी आगे बढ़ाएगा। हर पौधा राष्ट्रभक्ति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा। कॉस्मेटिक उत्पाद से लेकर कपड़ा उद्योग तक सिंदूर के पौधे का उपयोग
प्राकृतिक सिंदूर : बीजों से प्राप्त बिक्सिन रंग द्रव्य का उपयोग प्राकृतिक सिंदूर बनाने में किया जाता है।
खाद्य उद्योग : मक्खन, पनीर, चीज, मिठाई, बेकरी और स्नैक्स में प्राकृतिक फूड कलर के रूप में प्रयोग होता है।
कॉस्मेटिक उत्पाद : लिपस्टिक, ब्रश, फेस पाउडर व हर्बल कॉस्मेटिक में प्राकृतिक रंग के रूप में उपयोग होता है।
औषधीय उपयोग : आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में इसके विभिन्न भागों का सीमित उपयोग किया जाता है।
कपड़ा उद्योग : सूती-रेशमी कपड़ों की प्राकृतिक रंगाई में प्रयोग होता है। ऐसे तैयार किया जाएगा सिंदूर के बीज से प्राकृतिक सिंदूर
सिंदूर का पौधा 3 वर्ष में फल देने लगता है। फल पकने पर लाल रंग के कांटेदार कैप्सूल जैसे दिखते हैं। अंदर लाल-नारंगी रंग की परत से ढके बीज होते हैं। इसी प्राकृतिक रंग द्रव्य का प्रयोग सिंदूर बनाने में होता है। बीजों की बाहरी लाल परत को अलग कर चूर्ण बनाकर छानते हैं और फिर सिंदूर बनाते हैं।
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