Sunday, July 26, 2026
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पूर्वी राजस्थान की फेमस देसी डिश! गुड़, घी और आटे से मिनटों में तैयार


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Gud Ghee Atta Recipe: पूर्वी राजस्थान का यह पारंपरिक व्यंजन अपने सादे लेकिन लाजवाब स्वाद के कारण हर मौसम में लोगों की पहली पसंद बना रहता है. गुड़, शुद्ध घी और गेहूं के आटे से तैयार होने वाला यह देसी पकवान स्वाद के साथ पोषण भी देता है. त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इसे बड़े चाव से बनाया जाता है. इसकी पारंपरिक विधि पीढ़ियों से चली आ रही है, जो इसे खास पहचान दिलाती है. कम सामग्री में बनने वाली यह रेसिपी आज भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लोकप्रिय है और राजस्थान की समृद्ध खानपान संस्कृति की झलक पेश करती है.

पूर्वी राजस्थान की खानपान परंपरा में पुआ एक ऐसा व्यंजन है. जो हर मौसम में लोगों की पसंद बनी रहती है. खासकर ग्रामीण इलाकों में पुआ का स्वाद न सिर्फ घरों में बल्कि मेलों भंडारों और स्थानीय बाजारों में भी खूब देखने को मिलता है. मीठा, नरम और घी में तला हुआ यह व्यंजन अपनी खास खुशबू और स्वाद के कारण लोगों के दिलों में अलग जगह बनाए हुए है.

पुआ को सबसे ज्यादा पसंद का सबसे बड़ा कारण इसका पारंपरिक और देसी अंदाज है. यह कोई आधुनिक फास्ट फूड नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक ऐसी रेसिपी है. जो आज भी उसी सादगी और स्वाद के साथ तैयार की जाती है. पूर्वी राजस्थान भरतपुर, धौलपुर, करौली और डीग के कई गांव में त्योहारों, खास अवसरों और धार्मिक आयोजनों में पुआ बनाना शुभ माना जाता है. यही वजह है.

पुआ बनाने की प्रक्रिया भी बेहद खास और पारंपरिक है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले गुड़ या चीनी का घोल तैयार किया जाता है. जिसे स्थानीय भाषा में घोल कहा जाता है. इस घोल में गेहूं का आटा मिलाया जाता है और उसे अच्छे से फेंटा जाता है.इस मिश्रण को कुछ समय तक रखा जाता है. ताकि इसका स्वाद बेहतर हो सके यही प्रक्रिया पुआ को उसका खास नरमपन और मिठास देती है.

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जब यह मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाता है. तब इसे धीमी आंच पर घी में तला जाता है. पुआ को गोल आकार में डालकर तब तक पकाया जाता है. जब तक वह सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए घी में तलने के कारण इसकी खुशबू और स्वाद और भी बढ़ जाता है. बाहर से हल्का क्रिस्प और अंदर से नरम पुआ खाने में बेहद लाजवाब लगता है.

पुआ को आमतौर पर खीर या सब्जी के साथ परोसा जाता है. जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता हैं. खासकर भंडारों और धार्मिक आयोजनों में पुआ-खीर काफी लोकप्रिय है. वहीं बाजारों में भी यह आसानी से मिल जाता है और लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. कई जगहों पर इसे नाश्ते और मिठाई दोनों के रूप में परोसा जाता है.

आज के दौर में जहां फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है.वहीं पुआ जैसे पारंपरिक व्यंजन अपनी पहचान बनाए हुए हैं.पूर्वी राजस्थान में इसकी मांग बनी रहती है और लोग आज भी इसके देसी स्वाद को उतना ही पसंद करते हैं. पुआ न सिर्फ एक व्यंजन है. बल्कि यह यहां की संस्कृति, परंपरा और स्वाद की एक मीठी पहचान बन चुका है.

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