अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आधिकारिक हेलिकॉप्टर मरीन वन की उड़ान के दौरान सुरक्षा में चूक हुई है। मंगलवार को व्हाइट हाउस से उड़ान भरते समय मरीन वन और एक यात्री विमान तय सुरक्षा दूरी से ज्यादा करीब आ गए। इसके बाद अमेरिकी विमानन नियामक FAA ने मामले की जांच शुरू कर दी है। घटना मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे हुई। ट्रम्प व्हाइट हाउस से जॉइंट बेस एंड्रूज जा रहे थे। उसी समय एनवॉय एयर का एक यात्री विमान भी रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भर गया। FAA की शुरुआती जांच में पता चला कि दोनों विमान एक-दूसरे के सबसे करीब आने पर सिर्फ 1.3 किलोमीटर की दूरी पर थे। उनकी ऊंचाई में भी महज 700 फीट का अंतर रह गया था। अधिकारियों का कहना है कि दोनों विमान टक्कर की दिशा में नहीं थे और राष्ट्रपति की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं हुआ। घटना का वीडियो… सुरक्षा में चूक कैसे हुई? वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, मरीन वन की उड़ान के दौरान रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों को कुछ देर के लिए रोक दिया जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। एयर ट्रैफिक कंट्रोल समय पर उड़ानें नहीं रोक सका। इसी वजह से यात्री विमान ने भी टेकऑफ कर लिया FAA अब यह पता लगा रहा है कि सुरक्षा प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं हुआ और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से चूक कैसे हुई। ATC को तीन बार सूचना दी, जवाब नहीं मिला द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, उड़ान से पहले मरीन वन के क्रू ने कंट्रोल टावर को तीन बार बताया कि हेलिकॉप्टर तीन मिनट में उड़ान भरेगा। लेकिन रेडियो पर संदेश साफ नहीं सुनाई दिया। कंट्रोलर की ओर से भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद मरीन वन ने तय कार्यक्रम के मुताबिक उड़ान भर ली। कुछ देर बाद कंट्रोलर ने हेलिकॉप्टर को पास में उड़ान भर चुके यात्री विमान की जानकारी दी। पायलट ने बताया कि उसे दूसरा विमान दिखाई दे रहा है। इसके बाद हेलिकॉप्टर ने थोड़ी देर रुककर आगे उड़ान जारी रखी। नियम क्या कहते हैं? FAA के नियम के मुताबिक, ऐसे हालात में दो विमानों के बीच कम से कम 2.4 किलोमीटर की दूरी या ऊंचाई में 500 फीट का अंतर होना जरूरी है। इस मामले में दोनों विमानों की ऊंचाई का अंतर तय सीमा से ज्यादा था, लेकिन उनके बीच की दूरी घटकर करीब 1.3 किलोमीटर रह गई। इसी वजह से FAA ने इसे ‘लॉस ऑफ सेफ सेपरेशन’ यानी तय सुरक्षा दूरी का उल्लंघन माना है। मरीन वन कितना सुरक्षित है? अमेरिकी राष्ट्रपति का आधिकारिक हेलिकॉप्टर है। राष्ट्रपति इसमें सवार होते ही इसका कॉल साइन ‘मरीन वन’ हो जाता है। दुनिया के सबसे सुरक्षित वीआईपी हेलिकॉप्टरों में इसकी गिनती होती है। इसे अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के सबसे अनुभवी पायलट उड़ाते हैं, जिन्हें हाई-रिस्क मिशनों की खास ट्रेनिंग दी जाती है। उड़ान से पहले रूट, मौसम और एयरस्पेस की पूरी सुरक्षा जांच की जाती है। सुरक्षा के लिए एक साथ कई एक जैसे हेलिकॉप्टर उड़ते हैं, ताकि राष्ट्रपति किस हेलिकॉप्टर में हैं, यह पता न चल सके। 67 मौतों के बाद बने नियम का नहीं हुआ पालन 29 जनवरी 2025 को रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट के पास अमेरिकन एयरलाइंस के यात्री विमान और अमेरिकी सेना के ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर की हवा में टक्कर हो गई थी। इस हादसे में 67 लोगों की जान गई थी। इसके बाद FAA ने सुरक्षा नियम और सख्त कर दिए। तय किया गया कि जब भी राष्ट्रपति या सेना का हेलिकॉप्टर कम ऊंचाई पर उड़ान भरेगा, तब तक आसपास से कोई कमर्शियल विमान टेकऑफ या लैंडिंग नहीं करेगा। एयर ट्रैफिक कंट्रोल को भी पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि पूरा एयरस्पेस खाली और सुरक्षित है, तभी दूसरी उड़ानों को मंजूरी दी जाएगी। ATC कैसे काम करता है, इसके प्रोटोकॉल क्या हैं सुरक्षित दूरी टूटना सबसे बड़ा खतरा आसमान में विमानों के बीच तय सुरक्षित दूरी को ‘सेफ सेपरेशन’ कहा जाता है। अगर यह दूरी कम हो जाए, तो हवा में टक्कर का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए ATC की छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। VIP उड़ानों में नियम और सख्त
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