नमस्कार, इन दिनों ‘जैन जी’ की चर्चा है। कॉकरोच पार्टी वाले नहीं, बाडमेर वाले मेवाराम जैन जी, जिन्होंने जयपुर में शक्ति प्रदर्शन कर दिया। अलवर में वनमंत्री जी कलेक्टर साहिबा के खिलाफ धरने पर बैठ गए और दौसा में कोचिंग संचालक ने छात्रों को बैठे-बिठाए हवाई सफर का अनुभव करा दिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. ‘जैन जी’ का शक्ति प्रदर्शन ये ‘जैन जी’ जनरेशन वाले नहीं हैं। ये मेवाराम जैन हैं। जो लालसा की रपटीली राह पर एक बार फिसल गए थे और जिनके वीडियो रसिकों तक पहुंच गए थे। भजन गायक और गीतकार हरिओम शरण ने एक भजन लिखा और गाया था। भजन था- मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं। मेवाराम जी भी अभी तक यही सोचकर कतरा रहे थे। बाड़मेर से 3 बार विधायक रहे मेवाराम जैन की चादर पर उस घटना ने ऐसा दाग लगाया कि उनकी वैसी ही स्थिति हो गई, जैसे- लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे? लालसा का चक्कर ही ऐसा है कि बड़े-बड़े संत जेल की सजा काट रहे हैं। मेवाराम जैन किसी तरह उस घटना से बाहर निकल तो आए लेकिन छीछालेदर खूब हुई। कांग्रेस कमेटी के ही कुछ शरारती तत्वों ने शहरभर में उनके बड़े बड़े पोस्टर बनाकर टंगवा दिए थे। कुछ कार्यकर्ता चाहते थे कि मेवाराम की कांग्रेस में वापसी न हो। लेकिन मेवाराम कोशिश करते रहे। माफी मांगते रहे। चरित्र पर लगा दाग धोते रहे। ये धुल तो नहीं सकता, लेकिन वक्त के साथ हल्का जरूर पड़ जाता है। मेवाराम ने दोबारा जड़ें जमाई और कांग्रेस में वापसी की। अब निकाय चुनाव से पहले बाड़मेर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों-सरपंचों-समर्थकों को लेकर वे राजधानी पहुंचे। पूर्व सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात की। गहलोत ने उनकी ‘पर्सनलिटी’ की तारीफ की। मेवाराम पीसीसी दफ्तर भी पहुंचे। जहां चीफ साहब ने उनको 4 बार का विधायक कहा। जबकि वे 3 बार के विधायक हैं। समर्थकों ने जब ‘4 बार के विधायक’ को दुरुस्त करने की कोशिश की तो डोटासरा बोले- एक बार ज्यादा बता रहा हूं तो आपको क्या दिक्कत? इस पर सब हंस पड़े। वैसे दिक्कत उनको हो सकती है जो पोस्टर लगाने वाले गुट में शामिल थे। 2. कलेक्टर साहिबा पर भड़के वनमंत्री धरने का फैशन चल रहा है। इसी फैशन के हिसाब से वनमंत्री ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए और धरने पर बैठ गए। उन्होंने धरने पर बैठने के लिए नगर निगम को चुना और विरोध करने के लिए कलेक्टर साहिबा को। मंत्रीजी बोले- कलेक्टर रुख अजीब सा है। उन्होंने कलेक्टर साहिबा के उद्देश के बारे में बताया- उसको समाज का भला नहीं करना है। यहां कलेक्टर बनकर लूटकर खाना है। इसके बाद मंत्रीजी के मुंह से गाली जैसा भी कुछ निकल गया। हालांकि कलेक्टर पर गुस्सा करने का यह उनका पहला मौका नहीं था। इससे पहले सर्दी के सीजन में वे तत्कालीन सीकर कलेक्टर पर भी गर्म हो गए थे। तब कलेक्टर की भूल यह थी कि कैंप से गायब अफसरों की हिमायत कर रहे थे। इसी में मारे गए। मंत्रीजी ने गरजकर आदेश दिया- इन चोरों को प्रोटेक्शन देने की जरूरत नहीं। अलवर में मामला सफाई कर्मियों को नियुक्ति पत्र देने का था। आरोप है कि नगर निगम कमिश्नर नियुक्ति पत्र टालते रहे। इस बीच कमिश्नर का ट्रांसफर ऑर्डर आ गया। इस पर सफाईकर्मी भड़क गए और बोले कि नियुक्ति पत्र देकर जाओ वरना नहीं जाने देंगे। चैंबर से उन्हें निकलने नहीं दिया। पुलिस ने उन्हें निकाला। सफाई कर्मी वनमंत्री के पास पहुंच गए। मंत्री ने कलेक्टर से नियुक्ति पत्र की बात की। वे बोलीं- कमिशनर साहब फोन नहीं उठा रहे। मैं किसी को यहां बुलाकर जॉइन नहीं करवा सकती। इसी पर मंत्रीजी भड़के। इतना भड़के कि अपनी ही सरकार से कलेक्टर को हटाने की मांग कर डाली। कुछ दिन पहले PCC चीफ साहब को भी SDM से दिक्कत हो गई थी। दो दिन बाद ही एसडीएम साहब का तबादला सीकर से करौली हो गया। ऐसे में मंत्रीजी को भी मांग पूरी होने की जबरदस्त उम्मीद है। 3. चलते-चलते… होनहार छात्रों को हेलिकॉप्टर की सैर कराने की खबरें सामने आती हैं। सरकारी स्कूलों के ऐसे कई टीचर हैं जिन्होंने अपने खर्चे पर होनहार छात्रों को हवाई सफर कराया। हर टीचर के पास इतना जुगाड़ नहीं होता। फिर भी हर शिक्षक चाहता है कि वह अपने शिष्यों को आसमान छूते देखे। ये अलग बात है कि कई शिष्य ‘आसमान छूना’ और ‘हवा में उड़ना’ मुहावरों को एक समझ लेते हैं। दौसा में एक कोचिंग संचालक का जन्मदिन था। अपने जन्मदिन पर संचालक चाहता था कि उसके स्टूडेंट हवा में उड़ने का अनुभव लें। इसलिए उसने एक प्रोग्राम अरेंज किया। जिसमें विधायक डीसी बैरवा को बुला लिया। छत पर सैकड़ों छात्रों को जुटा लिया। इसके बाद अशोक शर्मा खेड़ला को पेश कर दिया। अशोक किसी हवाई वाहन के पायलट नहीं थे। वे एक मिमिक्री कलाकार हैं, जो मुंह से हेलिकॉप्टर की आवाज निकालते हैं। संचालक महोदय का आदेश हुआ और कलाकार ने हेलिकॉप्टर की आवाज निकालने शुरू किया। दूर से पास आता हेलिकॉप्टर, पास से दूर जाता हेलिकॉप्टर, लैंड करता हेलिकॉप्टर, उड़ान भरता हेलिकॉप्टर। बच्चों ने बैठे-बैठे ही हवा की सैर का अनुभव ले लिया। इनपुट सहयोग- स्वप्निल सक्सेना (सीकर), धर्मेंद्र यादव (अलवर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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