Saturday, August 22, 2026
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नाथद्वारा में देवशयन काल में देव प्रतिष्ठा को लेकर विवाद: प्रदर्शनकारी बोले- सनातन परंपराओं की अनदेखी हुई, मर्यादाओं का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं – rajsamand (kankroli) News




राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ स्थित फूटा देवल में 18 अगस्त को रामदरबार, राधाकृष्ण और 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। देवशयन काल में देव प्रतिष्ठा किए जाने का आरोप लगाते हुए विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, विप्र फाउंडेशन, युवा ब्रह्मशक्ति, ब्राह्मण महासभा, युवा श्रीमाली समाज और श्रीनाथजी की टोली सहित विभिन्न संगठनों ने नाराजगी जताई। शुक्रवार देर शाम नाथद्वारा की चौपाटी पर परशुराम सेवा मंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष का पुतला दहन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समाजजन मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुरूप ही देव प्रतिष्ठा किए जाने की मांग उठाई। देवशयन काल में प्रतिष्ठा को बताया शास्त्रसम्मत नहीं
पूर्व पार्षद पूरण श्रीमाली ने कहा कि सनातन धर्म की मान्यताओं और शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान के शयन का काल माना जाता है। इस अवधि में विवाह, उपनयन, देव प्रतिष्ठा सहित मांगलिक एवं शुभ संस्कार नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि इस दौरान भजन-कीर्तन, यज्ञ और धार्मिक साधना जैसे कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन देव विग्रहों की स्थापना को शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि धर्म और राजनीति के अपने-अपने कार्यक्षेत्र हैं। राजनीतिक और सामाजिक पदों पर बैठे लोगों को धार्मिक विषयों में निर्णय लेने से पहले धर्माचार्यों और शास्त्रों के जानकार विद्वानों से परामर्श करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हितों के लिए धर्म का सहारा लेकर शास्त्रीय मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। प्रायश्चित और फिर से प्राण प्रतिष्ठा की मांग
हिंदू संगठनों ने मांग की कि यदि देव प्रतिष्ठा शास्त्र-विरुद्ध तरीके से हुई है तो उसका विधिवत प्रायश्चित कराया जाए और शास्त्रसम्मत मुहूर्त में विग्रहों की पुनः प्राण प्रतिष्ठा कराई जाए। संगठनों का कहना है कि वर्तमान देवशयन काल में प्राण प्रतिष्ठा के लिए उपयुक्त समय नहीं है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने संबंधित ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जिम्मेदार पदाधिकारियों को ट्रस्ट से हटाने, प्रायश्चित कराने और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाने की मांग रखी। संगठनों ने चेतावनी दी कि सनातन धर्म की मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुतला दहन के दौरान विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।



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